Shahjahanpur news: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रीति की मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि सोशल मीडिया पर भी गंभीर चर्चा को जन्म दिया है. मृतका की बेटी ने विभागीय अधिकारियों पर मानसिक दबाव और वेतन न मिलने के आरोप लगाए हैं, जिसके बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.
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लंबे समय से वेतन और काम के दबाव से थीं परेशान
जानकारी के अनुसार गदियाना मोहल्ला निवासी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रीति पिछले काफी समय से नौकरी के दबाव और वेतन न मिलने की समस्या से जूझ रही थीं. उनकी बेटी स्मिता ने बताया कि करीब छह महीने से उनकी सैलरी नहीं मिली थी. इसके साथ ही नियमित काम के अलावा अतिरिक्त विभागीय जिम्मेदारियां भी दी जा रही थीं, जिससे उनका तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था.
परिजनों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की ओर से लगातार दबाव और धमकी दी जाती थी, जिसके कारण प्रीति मानसिक तनाव और डिप्रेशन का शिकार हो गई थीं. इसके बाद धीरे-धीरे उनकी तबियत बिगड़ती गई और आखिरकार उनकी मौत हो गई.
इलाज के दौरान सामने आई ये समस्या
परिवार के मुताबिक, जब प्रीति की तबियत अधिक खराब हुई तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने संक्रमण और एलर्जी की समस्या बताई. परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने और उपचार में देरी के कारण उनकी हालत और गंभीर हो गई.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से बढ़ा मामला
इस पूरे मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ. इस वीडियो में प्रीति की बेटी स्मिता ने अपनी मां के साथ हुए व्यवहार और विभागीय दबाव की पूरी कहानी साझा की. वीडियो सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश देखने को मिला और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई.
प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी की लापरवाही या दोष सामने आता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही परिवार को हर संभव सहायता और सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया गया है.
विभाग ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद रस्तोगी ने परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि मार्च 2026 तक का वेतन भुगतान किया जा चुका है और किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या उत्पीड़न की बात सही नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय कार्य पूरी जिम्मेदारी और नियमों के तहत संचालित किए जा रहे थे.
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. वहीं, इस घटना ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की कार्य परिस्थितियों और सुविधाओं को लेकर भी एक नई बहस छेड़ दी है.
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