27 फरवरी 2026 को अपने ही दफ्तर में 14 जानलेवा वार झेलने वाले सलीम वास्तिक अब पूरी तरह स्वस्थ हैं. खुद को एक्स-मुस्लिम कहने वाले सलीम ने अपने ताजा इंटरव्यू में कहा है कि मुस्लिम समुदाय को अब अपनी दिशा बदलने की जरूरत है. उन्होंने जोर देकर कहा कि मुट्ठी भर लोगों की जिहादी मानसिकता के कारण पूरी कौम को बदनामी झेलनी पड़ती है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
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'बंदूक नहीं, कलम थामें मेरे भाई'
सलीम वास्तिक ने समाज के लिए एक बड़ा संदेश देते हुए कहा, "मैं चाहता हूं कि मेरा मुस्लिम भाई समाज में सिर उठाकर जिए. हमें जिहादी नहीं, बल्कि पढ़-लिखकर बड़े अफसर बनने वाले युवाओं की जरूरत है." उन्होंने अपील की कि मुसलमान तरक्की के रास्ते पर चलें, अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और सम्मानजनक नौकरियां करें. सलीम का मानना है कि जब तक यह समाज कट्टरपंथी सोच के दायरे से बाहर नहीं आएगा, तब तक इसे वो असली सम्मान नहीं मिलेगा जिसका यह हकदार है.
सलीम ने खुलासा किया कि उन पर यह हमला उनकी उन वैचारिक टिप्पणियों के कारण हुआ, जो वे अक्सर धार्मिक ग्रंथों और कुरीतियों पर सोशल मीडिया के जरिए साझा करते थे. इसी रंजिश में बदमाशों ने उन पर 'सिर तन से जुदा' करने के इरादे से हमला किया था. उन्होंने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर भरोसा जताते हुए कहा कि जिशान और गुलफाम जैसे हमलावरों का एनकाउंटर करके पुलिस ने 'इंस्टेंट जस्टिस' दिया है, जिससे अपराधियों के मन में खौफ पैदा होगा.
'मैं अपनों का दुश्मन नहीं, हमदर्द हूं'
अपने ऊपर लगे आरोपों को दरकिनार करते हुए सलीम ने स्पष्ट किया कि वे मुस्लिम समुदाय के दुश्मन नहीं हैं. वे चाहते हैं कि हिंदुस्तान में रहने वाला हर मुसलमान शांति और गौरव के साथ रहे. उनका यह संघर्ष समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए है. वे कट्टरता की बेड़ियों को तोड़कर एक ऐसा समाज बनाना चाहते हैं जहाँ इंसानियत सबसे ऊपर हो.
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