2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने तकनीकी त्यागपत्र दे दिया है. रिंकू राही ने 16 बार की कड़ी मेहनत के बाद आईएएस की परीक्षा पास की थी, लेकिन काम न मिलने से वे आहत थे. उन्होंने नो वर्क, नो पे के सिद्धांत का पालन करते हुए सरकारी वेतन लेना भी बंद कर दिया था. उनका स्पष्ट कहना है कि अगर वे आईएएस के पद पर रहकर जनता की सेवा नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें इस पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है.
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सात पन्नों के अपने विस्तृत त्यागपत्र में रिंकू राही ने मांग की है कि उन्हें वापस उनके मूल पीसीएस (PCS) कैडर में भेज दिया जाए, ताकि वे जमीन पर रहकर लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकें. उनका यह संघर्ष नया नहीं है. साल 2009 में पीसीएस अधिकारी रहते हुए उन्होंने एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया था, जिसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ. उस हमले में उन्होंने अपनी एक आंख और सुनने की क्षमता खो दी थी, फिर भी उनका जज्बा कम नहीं हुआ. वे मानते हैं कि सत्ता और पद का मूल्य केवल कर्तव्यनिष्ठा में है, बिना काम के वेतन लेना उनकी नैतिकता के विरुद्ध है.
रिंकू सिंह राही के इस कदम ने देश के प्रशासनिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है. अब उनका यह मामला भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के पास विचाराधीन है, जो उनके तकनीकी इस्तीफे पर अंतिम निर्णय लेगा. यह घटना न केवल आईएएस और पीसीएस कैडर के बीच की जटिलताओं को उजागर करती है, बल्कि उन अधिकारियों के लिए एक बड़ा सबक भी है जो पद की गरिमा से ऊपर जनसेवा को रखते हैं. प्रशासन में सुधार और पारदर्शिता की दृष्टि से रिंकू राही का यह 'आत्मावलोकन' भविष्य के अधिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा.
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