IAS की कुर्सी ठुकराकर चर्चा में आए अधिकारी रिंकू सिंह राही की ये कहानी कम लोग ही जानते होंगे

IAS Rinku Singh Rahi: आईएएस रिंकू सिंह राही ने भ्रष्टाचार का खुलासा कर 16 बार परीक्षा देने के बाद 2023 में सफलता पाई. नो वर्क नो पे नीति अपनाकर उन्होंने ईमानदारी और समाज सेवा का संदेश दिया। उनकी कहानी संघर्ष और समर्पण की मिसाल है.

यूपी तक

• 01:37 PM • 03 Apr 2026

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IAS Rinku Singh Rahi: उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सरकार को अपना इस्तीफा सौंपकर प्रशासनिक अमले में खलबली मचा दी है. सात पन्नों के अपने 'टेक्निकल रेजिग्नेशन' में उन्होंने जो बातें लिखी हैं वे सिस्टम की कड़वी सच्चाई को उजागर करती हैं. रिंकू सिंह का साफ कहना है 'जब काम ही नहीं करना तो जनता के पैसे से तनख्वाह क्यों लेना?'

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जब आईएएस ने मांगी पीसीएस की कुर्सी

आईएएस रिंकू सिंह राही का इस्तीफा कोई साधारण घटना नहीं है. यह एक ऐसे अधिकारी की कहानी है जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा दी थी. फिलहाल राजस्व परिषद (Board of Revenue) में तैनात रिंकू सिंह का आरोप है कि उनसे कोई काम नहीं लिया जा रहा है. उन्होंने विभाग को चिट्ठी लिखकर यहां तक कह दिया कि उन्हें आईएएस पद से हटाकर वापस पीसीएस बना दिया जाए ताकि वे कम से कम जनता के छोटे काम तो कर सकें.

गोलियों के जख्म और ईमानदारी की जिद

रिंकू सिंह राही का सफर संघर्षों और साहस की मिसाल है. 26 मार्च 2009 में मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात रिंकू सिंह ने करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश किया था.नतीजा यह हुआ कि उन पर जानलेवा हमला हुआ और उनके शरीर में 7 गोलियां दागी गईं. इस हमले में उन्होंने अपनी एक आंख गंवा दी और शरीर का एक हिस्सा हमेशा के लिए दिव्यांग हो गया.गोलियों के जख्म और शारीरिक अक्षमता भी उनके हौसले को नहीं तोड़ पाई. उन्होंने हार नहीं मानी और 16 बार यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा दी. खास बात यह है कि 2018 तक उन्होंने दिव्यांगता कोटे का लाभ भी नहीं लिया और एक सामान्य अभ्यर्थी की तरह संघर्ष किया. आखिरकार 2023 में वे आईएएस बने.

शाहजहांपुर में एसडीएम पद पर तैनाती के दौरान जब एक व्यक्ति ने बुनियादी सुविधाओं के अभाव की बात की तो रिंकू सिंह ने अपनी और सरकार की गलती मानते हुए सार्वजनिक रूप से कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई थी. यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था.

इस्तीफे की असली वजह

रिंकू सिंह का कहना है कि उन्हें राजस्व परिषद में 'लाइन हाजिर' जैसी स्थिति में रखा गया है जहां उनके पास कोई काम नहीं है. उन्होंने अपने त्यागपत्र में लिखा कि जनता के टैक्स के पैसे से मिलने वाली तनख्वाह को वे तभी जस्टिफाई कर सकते हैं जब वे काम करें. काम न मिलने की स्थिति में उन्होंने "नो वर्क, नो पे" का फॉर्मूला अपनाने की बात कही और अंततः पद छोड़ने का निर्णय लिया. सिस्टम से समझौता न करने वाले इस अफसर की कहानी आज पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. रिंकू सिंह राही का यह कदम उन सभी के लिए एक संदेश है जो ईमानदारी और जवाबदेही को सर्वोपरि मानते हैं.