ओवैसी के ‘यादव समाजवाद’ वाले बयान ने खड़ा किया बड़ा विवाद, अखिलेश यादव और मोहन यादव को लेकर सियासी बहस तेज!

UP News: मैनपुरी में आयोजित एक चर्चा के दौरान यादव समाज के लोगों ने ओवैसी के यादव समाजवाद बयान, राम मंदिर चंदा विवाद और अखिलेश यादव के राजनीतिक रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी.

यूपी तक

• 11:19 AM • 26 Jun 2026

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UP News: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक सियासी चर्चा के दौरान “यादव समाजवाद” शब्द को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. यहां मौजूद यादव समाज के कई लोगों ने अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी-जिसमें समाजवादी पार्टी, ओवैसी के बयान, राम मंदिर चंदा विवाद और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का मुद्दा शामिल रहा. चर्चा के दौरान लोगों ने दावा किया कि कुछ राजनीतिक बयान समाज को बांटने और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए दिए जा रहे हैं.

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ओवैसी के “यादव समाजवाद” वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने समाजवादी विचारधारा को “यादव समाजवाद” बताया, मैनपुरी में मौजूद लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. कुछ लोगों का कहना था कि ओवैसी अक्सर बीजेपी के पक्ष में बयान देते हैं और धर्म के नाम पर राजनीति को बढ़ावा देते हैं. एक वक्ता ने आरोप लगाया कि ओवैसी और बीजेपी दोनों समाज को धर्म के आधार पर बांटने का काम करते हैं और देश में “ध्रुवीकरण” की राजनीति करते हैं.

राम मंदिर चंदा विवाद पर विपक्ष का हमला 

राम मंदिर चंदा चोरी मामले का भी इस चर्चा में जिक्र हुआ. लोगों ने आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और इस पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी है. कई वक्ताओं ने कहा कि ड्राइवर और छोटे कर्मचारियों को आगे करके बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है. उनका आरोप था कि असली जिम्मेदारों को अभी तक एफआईआर में शामिल नहीं किया गया है. साथ ही यह भी दावा किया गया कि यह मामला धर्म के नाम पर लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है और आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है.

अखिलेश यादव और मोहन यादव के समर्थन पर सियासी बहस

इस चर्चा में अखिलेश यादव के उस बयान का भी जिक्र हुआ, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का समर्थन किया था. कई लोगों ने इसे राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस बयान से असहमत हैं. वहीं कुछ का कहना था कि यह मुद्दा जानबूझकर उठाया गया ताकि असली विवादों से ध्यान हटाया जा सके.

मोहन यादव के रियल एस्टेट और जमीन कारोबार से जुड़े पुराने दावों का भी जिक्र किया गया और कहा गया कि उनके मुख्यमंत्री बनने और राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

यादव सरनेम और राजनीति पर टिप्पणी

एक अहम मुद्दा यह भी रहा कि “यादव सरनेम” को लेकर राजनीति की जा रही है. वक्ताओं ने कहा कि किसी ड्राइवर या कर्मचारी का सरनेम यादव होने से उसे किसी नेता से जोड़ना गलत है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की राजनीति केवल समाज को बांटने और भ्रम फैलाने के लिए की जा रही है.

बीजेपी, ओवैसी और विपक्ष पर आरोप-प्रत्यारोप

चर्चा के दौरान कई लोगों ने आरोप लगाया कि ओवैसी बीजेपी की “बी टीम” की तरह काम करते हैं और विपक्षी दलों को कमजोर करने का प्रयास करते हैं. इसके साथ ही यह भी कहा गया कि देश में कई नेताओं और पार्टियों पर एकतरफा कार्रवाई होती है, जबकि कुछ लोगों को बचाया जाता है. कुछ वक्ताओं ने यहां तक कहा कि अगर निष्पक्ष जांच हो तो बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार के मामले सामने आ सकते हैं.