राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी और आरोपों को लेकर ब्रज भूषण शरण सिंह ने दे दिया विवादित बयान...

Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग को लेकर सियासत तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है, जबकि राम मंदिर ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है और पारदर्शी ऑडिट का दावा किया है.

यूपी तक

11 Jun 2026 (अपडेटेड: 11 Jun 2026, 01:43 PM)

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Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और चोरी को लेकर चल रहा विवाद लगातार राजनीतिक रंग पकड़ता जा रहा है. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे विपक्षी दल इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी को घेर रहे हैं और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं. वहीं राम मंदिर ट्रस्ट ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और नियमित ऑडिट का हवाला दिया है. इसी बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का बयान सामने आने के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है.

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विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब 7 जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लगाए. इसके बाद आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी दान पेटियों की गिनती और चढ़ावे में अनियमितताओं का दावा किया. सपा नेता पवन पांडे ने भी दान राशि में करीब 7.5 करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी की आशंका जताई. इसके बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि दान पेटियों से पैसे चोरी के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, हालांकि इन दावों पर प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है.

ट्रस्ट और प्रशासन का पक्ष

इन सभी आरोपों के बीच अयोध्या प्रशासन और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि दान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होती है. ट्रस्ट के अनुसार, दान पेटियों की गिनती स्टेट बैंक के कर्मचारियों, ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में की जाती है और इसका नियमित ऑडिट भी होता है. ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने भी इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अब तक किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई है.

बृजभूषण शरण सिंह का विवादित बयान

इस पूरे मामले पर गोंडा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से सवाल किया गया, जिसमें राम मंदिर चढ़ावे और नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. जवाब में उन्होंने कहा कि वे “सच्चाई जानते तो हैं, लेकिन बोल नहीं सकते क्योंकि अगर बोले तो बड़ी परेशानी में पड़ सकते हैं और यह बहुत बड़े लोगों से जुड़ा मामला है.”

उन्होंने यह भी कहा कि सत्य बोलने की हिम्मत फिलहाल उनमें नहीं है और समय आने पर वे इस पर बात करेंगे. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर हलचल तेज हो गई है.

राजनीतिक बयानबाज़ी और विपक्ष का हमला

बृजभूषण के बयान के बाद विपक्ष ने एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा है. सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. वहीं बीजेपी के ही कुछ नेताओं ने भी इस मुद्दे पर पारदर्शी जांच की बात कही है और केंद्र सरकार से सीबीआई या ईडी जैसी एजेंसियों से जांच कराने की मांग उठाई है.