Agra South Assembly Seat:आगरा दक्षिणी सीट से वर्तमान विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का दबदबा पिछले तीन चुनावों से कायम है. यहां न केवल बीजेपी जीत रही है बल्कि जीत का अंतर भी लगातार बढ़ता जा रहा है. 2012 में विपरीत परिस्थितियों में मिली 24,000 की जीत, 2022 तक आते-आते 56,000 के पार पहुंच गई. लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार विपक्षी गठबंधन और मतदाता सूची से कटे करीब 1.10 लाख नाम बीजेपी के इस विजय रथ को रोक पाएंगे?
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योगेंद्र उपाध्याय का आत्मविश्वास
विधायक योगेंद्र उपाध्याय का कहना है कि मोदी-योगी के सक्षम नेतृत्व और उनके द्वारा कराए गए विकास कार्यों के सामने विपक्ष के पास कोई चेहरा नहीं है. उनका दावा है कि उन्होंने जनता के सुख-दुख में साथ दिया है जिसके परिणामस्वरूप जीत का अंतर हर बार बढ़ रहा है. वे 2027 की राह को बेहद आसान मान रहे हैं.
सपा और विपक्षी गठबंधन की रणनीति
वहीं समाजवादी पार्टी को लगता है कि इस बार खेल पलटने वाला है. सपा नेताओं का आरोप है कि पिछला चुनाव धांधली की वजह से हारे थे. उनका मानना है कि SIR (Statistical Integrity Report) के दौरान जो वोट कटे हैं, उनमें बड़ी संख्या बीजेपी के पारंपरिक वोटरों की है.सपा का गणित मुस्लिम (लगभग 80,000) और दलित (विशेषकर जाटव 50,000) वोटों की एकजुटता पर टिका है. उनका मानना है कि यदि दलित-मुस्लिम-पिछड़ा वर्ग एकजुट हुआ, तो यह सीट बीजेपी से छीनी जा सकती है.
पत्रकारों और विशेषज्ञों की राय: फंसा है पेंच!
स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि इस बार मुकाबला कांटे का हो सकता है. SIR में जो 1 लाख से अधिक नाम कटे हैं उनमें से कई सत्ता पक्ष के समर्थक बताए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विपक्ष ने दलित कार्ड (खासकर जाटव वोटों के लिए) सही से खेला और एक मजबूत गठबंधन बनाया तो बीजेपी के लिए जीत की राह कठिन हो सकती है. साथ ही, सत्ता विरोधी लहर और कार्यकर्ताओं की जमीन पर कम होती सक्रियता भी बीजेपी के लिए चिंता का विषय है.
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