मेरठ का शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट जो कभी शहर की व्यापारिक धड़कन हुआ करता था आज वहां सन्नाटा और मायूसी पसरी है. सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने यहां के व्यापारियों की नींद उड़ा दी है. आवास विकास परिषद द्वारा आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के आरोप में 1470 दुकानों और 31 बड़े भवनों को चिन्हित किया गया है.व्यापारियों का दर्द है कि वे 40-45 सालों से यहां काम कर रहे हैं. लेकिन अब उनके प्रतिष्ठानों पर ध्वस्तीकरण का खतरा मंडरा रहा है.
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1470 दुकानों पर संकट और ध्वस्तीकरण की तैयारी
मार्केट के व्यापारियों ने बताया कि हाल ही में एक कॉम्प्लेक्स की 22-23 दुकानों को तोड़ा गया था. इसके बाद आवास विकास ने पूरे क्षेत्र का सर्वे कर 1470 ऐसी संपत्तियों को मार्क किया है जहां आवासीय प्लॉट में कमर्शियल काम हो रहा है. प्रशासन ने व्यापारियों को नोटिस जारी कर व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने और भवन को मूल रूप में लाने के आदेश दिए हैं.
"हमारा वजूद मिट जाएगा"
धरने पर बैठे किशोर वशिष्ठ ने भावुक होकर कहा, 'इस बाजार को मैंने 35 सालों से संभाला है, इसे सेंट्रल मार्केट नाम मैंने दिया. अगर यह बाजार मिट गया, तो मेरा नाम और वजूद भी मिट जाएगा.' व्यापारियों का कहना है कि उन्हें कानून का सहारा लेना चाहिए था. लेकिन वे आंदोलनों में उलझे रह गए.अब उनकी आखिरी उम्मीद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी से है.
सरकार और जनप्रतिनिधियों से नाराजगी
प्रदर्शनकारियों ने 'सबका साथ सबका विकास के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज जब उनकी रोजी-रोटी पर संकट आया है तो उनके द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि लापता हैं. व्यापारियों का कहना है कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष रखना चाहिए या लैंड यूज चेंज कर इसे वैध बनाना चाहिए.उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सेंट्रल मार्केट नहीं बचा तो 2027 के चुनाव में व्यापारी अपनी ताकत दिखाएंगे.
भ्रष्टाचार और आवास विकास पर सवाल
वहां मौजूद पूर्व बैंक अधिकारियों और निवासियों ने सवाल उठाया कि जब यह मार्केट सालों से विकसित हो रहा था. तब आवास विकास के अधिकारियों ने क्या किया? उनका आरोप है कि अधिकारियों ने पैसे लेकर इसे बसने दिया और अब वे ही इसे तोड़ने की तैयारी कर रहे हैं. व्यापारियों की मांग है कि पेनल्टी या कंपाउंडिंग करके इसे नियमित किया जाना चाहिए.क्योंकि ध्वस्तीकरण से अरबों का नुकसान होगा और हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे.
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