मेरठ के सेंट्रल मार्केट को गिराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पिछले 15 दिनों से दुकानदार सड़क पर हैं. भारी आक्रोश और अनिश्चितता के बीच, मेरठ के सांसद अरुण गोविल जब प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे, तो वहां एक बेहद भावुक मंजर देखने को मिला. 'रामायण' में भगवान राम का किरदार निभाकर जन-जन के आराध्य बने गोविल ने राजनीति के मैदान में भी अपनी वही सौम्यता और संवेदनशीलता दिखाई, जिसने मेरठ की जनता का दिल जीत लिया.
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आरती और आंसुओं के बीच 'राम' की मौजूदगी
सेंट्रल मार्केट के दुकानदार, जो भाजपा के पारंपरिक वोटर भी माने जाते हैं, अपने भविष्य को लेकर बेहद परेशान हैं. जब अरुण गोविल उनके बीच पहुंचे, तो वे सामान्य कुर्सी पर बैठकर एक व्यक्ति द्वारा गाई जा रही आरती को पूरी तन्मयता से सुनते नजर आए. इस भावुक पल का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. वीडियो देखकर लोग अपनी भावनाएं नहीं रोक पा रहे हैं और कई यूजर्स ने लिखा कि सांसद का यह संवेदनशील व्यवहार उनके 'राम' वाले स्वरूप की याद दिलाता है.
बीएससी की पढ़ाई से अभिनय और संसद तक का सफर
अरुण गोविल का जीवन सादगी और संघर्ष की मिसाल रहा है.
- शिक्षा: उन्होंने आगरा से बीएससी (B.Sc.) की पढ़ाई पूरी की.
- फिल्मी करियर: मुंबई में अपने भाई के पास रहकर उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा. साल 1977 में उनकी पहली फिल्म 'पहेली' रिलीज हुई. 80 और 90 के दशक में उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया.
- वैश्विक पहचान: रामानंद सागर की 'रामायण' में भगवान राम का किरदार निभाने के बाद वे घर-घर में पूजे जाने लगे. आज भी जनता उन्हें उसी श्रद्धा भाव से देखती है.
राजनीतिक पारी: आस्था और विश्वास का संगम
साल 2021 में अरुण गोविल ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा. 2024 के लोकसभा चुनाव में मेरठ की जनता ने उन पर अटूट विश्वास जताया और उन्हें संसद भेजा. सांसद बनने के बाद भी गोविल का आचरण उनकी उसी छवि के अनुरूप है, जो संयम और सहानुभूति पर आधारित है.
मार्केट विवाद और जनता की उम्मीदें
मेरठ के इस प्रदर्शन में गोविल की उपस्थिति ने दुकानदारों को एक संबल दिया है. धरने पर बैठे सदस्यों ने गीतों और भजनों के जरिए अपनी व्यथा सुनाई. हालांकि, दुकानदार अभी भी राहत के लिए लिखित आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अपने सांसद को अपने बीच पाकर वे काफी भावुक और प्रभावित नजर आए. यह घटना दर्शाती है कि अरुण गोविल केवल एक राजनीतिक प्रतिनिधि नहीं, बल्कि जनता के लिए आस्था का केंद्र भी हैं.
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