Salim Vastik News: सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान की गिरफ्तारी के साथ ही दिल्ली पुलिस ने करीब तीन दशक पुराने एक जघन्य हत्याकांड के अध्याय को बंद करने में बड़ी सफलता हासिल की है. गाजियाबाद के लोनी इलाके से दबोचा गया यह अपराधी पिछले 25 वर्षों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहा था. अपहरण, रंगदारी और हत्या जैसे गंभीर अपराधों का दोषी सलीम अब एक बार फिर सलाखों के पीछे है.
ADVERTISEMENT
25 साल की फरारी और पहचान का खेल
सलीम खान का असली नाम सलीम वास्तिक है. साल 1995 में उसने 13 वर्षीय मासूम संदीप बंसल का अपहरण किया था और फिरौती वसूलने के बाद उसकी निर्मम हत्या कर दी थी. इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. हालांकि, जेल से जमानत (पैरोल) मिलने के बाद वह फरार हो गया और तब से पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी. अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने कई बार नाम बदले और अलग-अलग शहरों में छिपकर रहा.
लोनी में बदली पहचान और जानलेवा हमला
फरारी के दौरान सलीम ने गाजियाबाद के लोनी को अपना ठिकाना बनाया. वह यहाँ एक आम नागरिक की तरह रह रहा था ताकि किसी को शक न हो. दिलचस्प बात यह है कि करीब दो महीने पहले उस पर एक जानलेवा हमला भी हुआ था, जिसमें वह बाल-बाल बच निकला था. इस हमले के बाद वह और भी अधिक सतर्क हो गया था, लेकिन दिल्ली पुलिस के सटीक सर्विलांस और लंबी जांच ने आखिरकार उसकी लोकेशन ट्रेस कर उसे दबोच लिया.
न्याय की जीत और पुलिस की बड़ी कामयाबी
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, सलीम वास्तिक की गिरफ्तारी कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. आरोपी ने समाज में लंबे समय तक दहशत और अशांति फैलाई थी. उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे, जिसके कारण वह 'मोस्ट वांटेड' की श्रेणी में आ चुका था. पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी साबित करती है कि कानून की पकड़ से कोई भी अपराधी बच नहीं सकता, चाहे वह कितने ही साल क्यों न बीत जाएं.
फिलहाल, पुलिस सलीम वास्तिक से गहन पूछताछ कर रही है ताकि उसकी फरारी के दौरान मिले सहयोगियों और अन्य आपराधिक कड़ियों का खुलासा किया जा सके. 29 साल बाद हुई इस कार्रवाई से पीड़ित परिवार को एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगी है.
ADVERTISEMENT









