वाराणसी से लखनऊ की यात्रा पर निकले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यूपी तक के साथ एक विशेष बातचीत में गौ रक्षा, राजनीति और हालिया विवादों पर अपनी बेबाक राय रखी है. शंकराचार्य ने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी गौ माता की रक्षा न हो पाना दुर्भाग्यपूर्ण है. अब यह यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि गौ माता को 'राष्ट्रमाता' घोषित कराने के लिए एक धर्म युद्ध है. उन्होंने हिंदुओं से अपील की कि वे किसी विशेष पार्टी के घोषणापत्र के बजाय अपना खुद का घोषणापत्र तैयार करें और केवल उसी पार्टी को वोट दें जो गौ रक्षा का वादा करे.
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अखिलेश यादव के समर्थन पर उन्होंने कहा कि जब अन्याय होता है, तो कोई भी खड़ा हो सकता है. प्रश्न यह नहीं है कि अखिलेश क्यों आए, प्रश्न यह है कि जो पार्टी खुद को हिंदूवादी कहती है (भाजपा), वह और मुख्यमंत्री उस समय आगे क्यों नहीं आए जब हिंदुओं और बटुकों पर अत्याचार हुआ. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि असल हिंदू वह है जो संकट के समय खड़ा हो, केवल दिखावा करने वाला नकली हिंदू किसी काम का नहीं.
खुद पर लगे आरोपों और विवादों पर सफाई
अपने ऊपर लगे संगीन आरोपों पर शंकराचार्य ने कहा कि यह सब एक साजिश है. जिस हिस्ट्रीशीटर ने शिकायत की है, उसके पीछे कौन लोग हैं, यह दुनिया जानती है. उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक इसलिए लगाई क्योंकि सरकार के वकील ने भी स्वीकार किया कि शिकायत करने वाले लड़के कभी उनके आश्रम में रहे ही नहीं. शंकराचार्य ने बताया कि 11 मार्च को लखनऊ में होने वाली सभा के लिए ऑनलाइन आवेदन बहुत पहले कर दिया गया था. इस सभा के माध्यम से वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उन प्रश्नों का उत्तर मांगेंगे जो 40 दिन से अनुत्तरित हैं, और गौ माता की रक्षा के लिए अंतिम प्रहार (वैचारिक युद्ध) शुरू करेंगे.
यूजीसी विवाद और 'एक्स-मुस्लिम' विवाद पर भी बोले
उन्होंने यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए कहा कि यह सनातन धर्म की वर्ण व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने वाली राजनीति है. गाजियाबाद के 'एक्स-मुस्लिम' सलीम वास्तिक पर हुए हमले की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि गला काटने के बजाय बौद्धिक खंडन किया जाना चाहिए.
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