UP Youngest MLA: उत्तर प्रदेश की राजनीति को अक्सर बुजुर्गों और अनुभवी नेताओं का गढ़ माना जाता है, लेकिन समय-समय पर सूबे के युवाओं ने इस धारणा को तोड़ा है. भारतीय संविधान के मुताबिक, भारत में विधायक बनने की न्यूनतम उम्र 25 वर्ष है. यूपी के इतिहास में कुछ ऐसे चुनिंदा चेहरे रहे हैं जिन्होंने इस उम्र सीमा को छूते ही सीधे विधानसभा का टिकट पाया और जीतकर लखनऊ पहुंच गए.
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आइए जानते हैं यूपी के इतिहास में सबसे कम उम्र में विधायक बनने वाले उन युवा नेताओं के बारे में, जिन्होंने बहुत छोटी उम्र में राजनीति की बड़ी पिच पर छक्का लगाया.
सुल्तानपुर सदर से अरुण वर्मा
साल 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के लहर के बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा... अरुण वर्मा. मात्र 25 साल की उम्र में सपा ने उन्हें सुल्तानपुर सदर सीट से मैदान में उतारा, जिस सीट पर पार्टी कभी नहीं जीती थी. अरुण वर्मा ने न सिर्फ वहां से जीत दर्ज की, बल्कि तत्कालीन समय में उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के विधायक बने. उन्हें 'आदर्श युवा विधायक' का पुरस्कार भी मिला.
राहुल राजपूत और अंकित भारती
साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी ने युवाओं पर बड़ा दांव खेला था. इस चुनाव में दो ऐसे चेहरे आए जिन्होंने ठीक 25 साल की उम्र में विधानसभा की दहलीज पार की...
- राहुल राजपूत: सपा के टिकट पर रायबरेली की हरचंदपुर सीट से चुनाव लड़ने वाले राहुल राजपूत ने महज 25 साल की उम्र में जीत का परचम लहराया.
- अंकित भारती: आजमगढ़ की सैदपुर विधानसभा सीट से मैदान में उतरे अंकित भारती ने भी सिर्फ 25 साल की उम्र में विधायक बनकर सबको चौंका दिया था.
राजा भैया (रघुराज प्रताप सिंह): 26 की उम्र में निर्दलीय हुंकार
यूपी की सियासत में 'राजा भैया' के नाम से मशहूर रघुराज प्रताप सिंह का नाम इस लिस्ट में न आए, ऐसा हो नहीं सकता. साल 1993 में जब राजा भैया ने पहली बार प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से चुनाव जीता था, तब उनकी उम्र महज 26 साल थी. उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी और तब से लेकर आज तक कुंडा सीट पर उनका दबदबा कायम है.
आजम खान: 26 की उम्र में पहली जीत (1980)
यूपी की राजनीति का एक बड़ा नाम रहे आजम खान ने अपनी सियासी पारी की शुरुआत बहुत कम उम्र में की थी. साल 1980 में जब उन्होंने रामपुर विधानसभा सीट से जनता पार्टी (सेक्युलर) के टिकट पर पहली बार जीत दर्ज की थी, तब उनकी उम्र महज 26 साल के करीब थी. इसके बाद वह लगातार इसी सीट से विधानसभा पहुंचते रहे.
मुख्तार अंसारी: 26-27 की उम्र में कदम
मऊ विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक रहे मुख्तार अंसारी ने जब 1996 में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता था, तब वह भी युवा थे और उनकी उम्र 26-27 वर्ष के आसपास थी. उन्होंने पहली बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर जीत हासिल की थी.
संदीप सिंह: 26 साल की उम्र में मंत्री पद की ओर (2017)
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता स्वर्गीय कल्याण सिंह के पोते संदीप सिंह ने साल 2017 के विधानसभा चुनाव में अलीगढ़ की अतरौली सीट से जीत दर्ज की थी. उस समय उनकी उम्र महज 26 साल थी. वह न सिर्फ विधायक बने, बल्कि योगी सरकार के पहले कार्यकाल में सबसे कम उम्र के मंत्रियों में से एक भी बने.
अब्दुल्ला आजम खान: 26 की उम्र में पहली जीत (2017)
आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान ने साल 2017 में रामपुर की स्वार विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था. हलफनामे के अनुसार उस समय उनकी उम्र 26 साल थी. हालांकि बाद में उनकी उम्र के दस्तावेजों को लेकर काफी कानूनी विवाद भी हुआ था.
क्या 25 वर्ष से कम उम्र का कोई व्यक्ति विधायक बन सकता है?
नहीं. भारतीय संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति राज्य विधानसभा (MLA) का चुनाव लड़ने के लिए 25 वर्ष से कम उम्र का नहीं हो सकता. इसलिए उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश के किसी भी राज्य में 25 वर्ष से कम उम्र का विधायक नहीं बन सकता.
भारतीय संविधान विधायकों के बारे में क्या कहता है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 173 में राज्य विधानमंडल की सदस्यता के लिए आवश्यक योग्यताओं का उल्लेख किया गया है...
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