Noida Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) सिर्फ हवाई जहाजों के उड़ने का ठिकाना नहीं होगा, बल्कि देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट बनने जा रहा है जो एक साथ इंटीग्रेटेड कार्गो (माल ढुलाई) और MRO (Maintenance, Repair, and Overhaul) यानी विमानों की मरम्मत और ओवरहालिंग का सबसे बड़ा हब होगा.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि इस सुविधा का सबसे ज्यादा फायदा पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे राज्य के किसानों को मिलेगा. अब हमारे खेत के उत्पाद सीधे दुनिया के बड़े बाजारों में बिकने के लिए उड़ान भरेंगे.
बिचौलियों का खेल खत्म, मुनाफे की गारंटी
यूपी के किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि उनकी हरी सब्जियां, ताजे फल और अनाज सही समय पर बड़े बाजारों तक नहीं पहुंच पाते थे. कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन की कमी से फसलें खराब हो जाती थीं और किसान औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर थे, लेकिन जेवर एयरपोर्ट पर बन रहे कार्गो हब से पूरी कहानी बदलने वाली है...
- डायरेक्ट एक्सपोर्ट: अब पश्चिमी यूपी के आम, अमरूद, बासमती चावल, आलू और ताजी सब्जियां सीधे लंदन, दुबई, अमेरिका और खाड़ी देशों के बाजारों में पहुंचेंगी.
- ताजगी बरकरार: हवाई मार्ग से चंद घंटों में फसल विदेश पहुंच जाएगी, जिससे उसकी क्वालिटी और ताजगी बनी रहेगी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके बेहतरीन दाम मिलेंगे.
- कमाई में उछाल: जब बिचौलियों की लंबी चेन खत्म होगी और किसान सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ेगा, तो उनकी जेब में आने वाला मुनाफा दोगुना से तीन गुना तक बढ़ सकता है.
जेवर बनेगा कृषि अर्थव्यवस्था का सेंट्रल हब
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ किया है कि इस पूरी योजना का केंद्र बिंदु जेवर होगा. इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि पूरे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को रफ्तार दे सके.
क्यों खास है यह कार्गो हब?
आमतौर पर एयरपोर्ट्स पर पैसेंजर्स पर ज्यादा ध्यान होता है, लेकिन जेवर में एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ माल ढुलाई के लिए सुरक्षित किया गया है. यहां जल्दी खराब होने वाले सामान जैसे फल, सब्जी, फूल के लिए कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा, ताकि किसानों का सामान खराब न हो.
पश्चिमी यूपी के किसानों की चमकेगी किस्मत
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैसे भी देश का 'अन्नदाता बेल्ट' कहा जाता है. मेरठ का गन्ना-गुड़, हापुड़-बुलंदशहर की सब्जियां, सहारनपुर का आम और बागपत के कृषि उत्पाद अब तक दिल्ली के बाजारों तक ही सिमट कर रह जाते थे.
MRO हब बनने का भी अप्रत्यक्ष फायदा
इस प्रोजेक्ट में एक और बड़ी बात है- एमआरओ सेंटर. इसका मतलब है कि देश-विदेश के हवाई जहाजों की मरम्मत और सर्विसिंग भी जेवर में होगी. भारत का पहला ऐसा हब होने के कारण यहां दुनिया भर की एविएशन कंपनियों का आना-जाना होगा. जब यहां एक बड़ा बिजनेस इकोसिस्टम बनेगा, तो इसका सीधा असर आसपास के इलाकों के विकास और किसानों की जमीनों की वैल्यू पर भी पड़ेगा.
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