Noida International Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (jewar) से आज उड़ानों का सिलसिला आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है. लखनऊ से आए इंडिगो के विमान ने जैसे ही जेवर की धरती पर लैंड किया, वैसे ही दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मार्च 2026 में उद्घाटन किए जाने के बाद, आज पहली कमर्शियल फ्लाइट (commercial flight) के टेकऑफ और लैंडिंग ने इस एयरपोर्ट को एक्टिव कर दिया है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और पूरे पश्चिमी यूपी (मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, आगरा) के आम लोगों और कारोबारियों को इससे क्या फायदे मिलेंगे?
जब बात नोएडा के लोगों की आती है, तो दूरी और समय को लेकर गणित थोड़ा अलग है.
नोएडा के कोर सेक्टर्स से जेवर एयरपोर्ट की दूरी दिल्ली एयरपोर्ट (Delhi airport) के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा है. हालांकि, जानकारी के मुताबिक चूंकि जेवर जाने के लिए पूरा रास्ता सिग्नल-फ्री एक्सप्रेसवे का है, इसलिए 66 किलोमीटर की यह दूरी भी करीब 1 घंटे 5 मिनट में तय की जा सकती है, जबकि दिल्ली एयरपोर्ट जाने में ट्रैफिक के कारण करीब 55 मिनट का समय लगता है.
तो फिर नोएडा और पश्चिमी यूपी के लोगों को क्या सहूलियत मिलेगी?
1. दिल्ली के ट्रैफिक और पीक-आवर के जाम से मुक्ति
दिल्ली एयरपोर्ट जाने के लिए यात्रियों को धौला कुंआ, राव तुला राम मार्ग या महिपालपुर के भारी ट्रैफिक से गुजरना पड़ता है. पीक आवर्स में ये सफर अनिश्चित हो जाता है. इसके विपरीत, जेवर एयरपोर्ट के लिए यमुना एक्सप्रेसवे का रास्ता पूरी तरह चौड़ा और सिग्नल-फ्री है, जिससे सफर तनावमुक्त रहेगा.
2. 'ग्रेटर नोएडा' और 'यमुना एक्सप्रेसवे' के निवासियों को सीधा फायदा
नोएडा के मुख्य शहर से भले ही ये दूर हो, लेकिन ग्रेटर नोएडा, कासना, दादरी और yamuna expressway (सेक्टर 18, 20, 22 आदि) में रहने वाले लोगों के लिए जेवर एयरपोर्ट बेहद पास पड़ेगा. उन्हें अब फ्लाइट पकड़ने के लिए 60-70 किलोमीटर दूर दिल्ली जाने की जरूरत नहीं होगी.
3. पश्चिमी यूपी के जिलों के लिए वरदान
इस एयरपोर्ट का सबसे बड़ा फायदा नोएडा से सटे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों को होगा. अलीगढ़, बुलंदशहर, मथुरा, आगरा के लोगों के लिए दिल्ली एयरपोर्ट जाना एक बेहद लंबा और थकाऊ सफर होता था.
अब ये सभी शहर यमुना एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे के जरिए सीधे jewar airport से कनेक्टेड हैं, जिससे इन जिलों के करोड़ों लोगों को अपने घर के पास इंटरनेशनल कनेक्टिविटी मिल गई है.
4. मल्टीमॉडल हब और उद्योगों का विकास (एयरोट्रोपोलिस)
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट को एक 'एयरोट्रोपोलिस' के रूप में विकसित किया जा रहा है. हवाई कनेक्टिविटी के साथ-साथ इसे सड़कों और भविष्य में रैपिड रेल व मेट्रो से जोड़ा जाएगा. इससे आसपास के इलाकों में मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और गारमेंट इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.
5. टूरिज्म और व्यापार को मिलेगी रफ्तार
पश्चिमी यूपी में आगरा का ताजमहल, मथुरा-वृंदावन के मंदिर और मेरठ-अलीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र हैं. विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए अब सीधे पश्चिमी यूपी पहुंचना आसान होगा, जिससे स्थानीय टूरिज्म और हस्तशिल्प के व्यापार को भारी मुनाफा होगा.
6. रियल एस्टेट में उछाल, संपत्ति के दाम बढ़ेंगे
जेवर एयरपोर्ट के चालू होने से यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के इलाकों की वैल्यू अचानक बहुत बढ़ गई है. जिन लोगों के पास यहां जमीन या घर हैं, उनकी प्रॉपर्टी के दाम बढ़ेंगे. साथ ही, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण इस पूरे इलाके का तेजी से विकास होगा.
पहली फ्लाइट में 172 ग्रामीणों ने भी किया सफर
आज जो पहली फ्लाइट जेवर से लखनऊ के लिए रवाना हुई, उसमें उन 172 ग्रामीणों को भी सफर कराया गया, जिनकी जमीन इस एयरपोर्ट को बनाने के लिए ली गई थी. यह जेवर के स्थानीय लोगों के योगदान को एक अनोखा सम्मान था.
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