यूपी कैडर के 2000 बैच के आईएएस अधिकारी अनुराग यादव को पश्चिम बंगाल में चुनाव पर्यवेक्षक के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है. यह कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान हुई बहस के बाद की गई है. महज 10 दिन पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग से हटाकर समाज कल्याण विभाग भेजा था. इस बीच अनुराग यादव चर्चा के केंद्र में हैं. आइए आपको खबर में आगे बताते हैं कि कौन हैं IAS अनुराग यादव?
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क्या है पूरा मामला?
जानकारी मिली है कि बुधवार को पश्चिम बंगाल चुनाव की तैयारियों को लेकर आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कूच बिहार के ऑब्जर्वर अनुराग यादव से एक सीधा सवाल पूछा, "आपके दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में कितने पोलिंग स्टेशन हैं?"
इस सवाल का जवाब देने में अनुराग यादव को देरी हुई, जिस पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने अचरज जताते हुए टिप्पणी की. इस पर अनुराग यादव ने पलटवार करते हुए कहा, "मैं भी इस सेवा में 25 साल से हूं, आप मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते." ऐसा दावा है कि इस तीखी नोकझोंक के बाद देर रात उन्हें पर्यवेक्षक पद से हटा दिया गया.
10 दिन पहले क्यों चर्चा में आए थे अनुराग यादव?
अनुराग यादव 30 मार्च 2026 तक आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव थे. 10 दिन पहले ही उनका तबादला समाज कल्याण व सैनिक कल्याण विभाग में किया गया. इस अचानक फेरबदल की वजह एक विवादित एमओयू (MoU) बताया गया. दरअसल, 'AI PUCH' नामक एक कंपनी के साथ 25000 करोड़ रुपये का करार किया गया था, जो जांच में महज कागजों पर काम करने वाली कंपनी निकली. इस मुद्दे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार और नौकरशाही को जमकर घेरा था जिसके बाद अनुराग यादव को विभाग से हटा दिया गया.
काैन हैं अनुराग यादव?
अनुराग यादव मूल रूप से आजमगढ़ के निवासी हैं. व्यावहारिक प्रशिक्षण के बाद उन्हें पहला जिला जौनपुर मिला, जहां वे मार्च 2005 से मई 2007 तक डीएम रहे. वे मार्च 2012 से फरवरी 2014 तक लखनऊ के डीएम और अगस्त 2014 से फरवरी 2016 तक झांसी के डीएम रहे.
वर्तमान सरकार में भी वे फाइनेंस सेक्रेट्री, शहरी विकास और कृषि विभाग जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे. जनवरी 2025 में उन्हें आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया था.
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