उत्तर प्रदेश विजिलेंस की कानपुर यूनिट ने वाणिज्य कर विभाग के पूर्व एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज किया है. जांच में सामने आया है कि केशव लाल ने अपनी सेवा अवधि के दौरान भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों की बेनामी संपत्ति अर्जित की. उनकी कुल संपत्ति का आंकड़ा 100 करोड़ रुपये के पार बताया जा रहा है.
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बाथरूम के फ्लश और गद्दों में मिला था खजाना
मालूम हो कि केशव लाल की काली कमाई का खुलासा पहली बार साल 2017 में हुआ था. उस समय वह कानपुर में तैनात थे और आयकर विभाग ने उनके नोएडा स्थित आवास पर छापेमारी की थी. रेड के दौरान अधिकारी तब दंग रह गए जब नोटों की गड्डियां पूजा घर, अलमारियों, बिस्तर के गद्दों और बाथरूम के फ्लश टैंक से बरामद हुईं. उस समय करीब 10 करोड़ रुपये नकद और 3 करोड़ की ज्वेलरी जब्त की गई थी.
विजिलेंस की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, केशव लाल की पूरे करियर की वैध आय मात्र 1.34 करोड़ रुपये थी. इसके विपरीत, उन्होंने 18.27 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च और निवेश किया. यानी अपनी वास्तविक कमाई से 17.26 करोड़ रुपये (1282%) ज्यादा खर्च किए. इसी भारी गड़बड़ी के चलते सरकार ने उन्हें 2017 में ही रिटायर कर दिया था.
पांच शहरों में करोड़ों की बेनामी संपत्ति
भ्रष्टाचार की यह कमाई उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में फैली हुई है. विजिलेंस जांच में पाया गया कि केशव लाल के पास लखनऊ में दो आलीशान मकान, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर और प्रयागराज में बेशकीमती प्लॉट और घर और गृह जनपद चंदौली में भी करोड़ों का निवेश है. इन सभी संपत्तियों के दस्तावेज मिलने के बाद विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की है.
अगस्त 2023 से चल रही गहन जांच के बाद, विजिलेंस ने शासन से अनुमति मांगी थी. अब अनुमति मिलते ही उन पर शिकंजा कस दिया गया है. विभाग का मानना है कि उनकी अचल संपत्तियों की बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है.
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