Welcome 2026: वक्फ, मदरसा और मस्जिद... बीते साल 2025 में यूपी के अंदर इन बातों ने मचाया हंगामा

साल 2025 में उत्तर प्रदेश में वक्फ पंजीकरण, मदरसा सुधार, मस्जिद-मंदिर विवाद और कांवड़ यात्रा जैसे मुद्दों ने सियासी और सामाजिक हलचल पैदा की, जहां सरकार और विपक्ष के बीच संघर्ष जारी रहा.

यूपी तक

01 Jan 2026 (अपडेटेड: 01 Jan 2026, 08:03 AM)

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साल 2025 उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक ताने-बानों के लिए काफी हलचलों भरा रहा. ईयर एंडर के रूप में जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण से लेकर मदरसों के पाठ्यक्रम में सुधार और मस्जिदों से जुड़े कानूनी विवादों ने पूरे साल सुर्खियां बटोरीं. सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार जहां कड़े नियमों और सुधारों पर अडिग दिखी, वहीं विपक्षी दलों और समुदाय के एक वर्ग ने इन्हे 'धार्मिक ध्रुवीकरण करार देकर कड़ा विरोध किया.

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पेश हैं साल 2025 की वो बड़ी खबरें जिन्होंने उत्तर प्रदेश में सियासत का पारा गर्म रखा:

1. वक्फ संशोधन अधिनियम और उम्मेद (UMEED) पोर्टल पर पंजीकरण

साल 2025 की सबसे बड़ी खबरों में से एक वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 का क्रियान्वयन रहा. अप्रैल में परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे लागू किया गया. सरकार ने राज्य की सभी वक्फ संपत्तियों क उम्मेद पोर्टल पर पंजीकृत करना अनिवार्य कर दिया. यूपी में देश की सर्वाधिक 1.27 लाख वक्फ संपत्तियां हैं (1.19 लाख सुन्नी और 8000 शिया). दिसंबर तक लगभग 70% सुन्नी और 6,500 शिया संपत्तियों का पंजीकरण पूरा हो चुका था. सरकार का तर्क है कि इससे पारदर्शिता आएगी, जबकि विरोधियों ने इसे वक्फ के अधिकारों में दखल माना. 

2. आई लव मोहम्मद और कांवड़ यात्रा मार्ग पर नेमप्लेट विवाद

जुलाई-अगस्त के महीनों में कांवड़ यात्रा के दौरान खान-पान की दुकानों पर मालिक का नाम प्रदर्शित करने के आदेश ने देशभर में बहस छेड़ दी. विपक्षी नेताओं जैसे असदुद्दीन ओवैसी और एसटी हसन ने इसे धार्मिक प्रोफाइलिंग बताया. ओवैसी ने आरोप लगाया कि दिल्ली-देहरादून हाईवे पर ढाबा मालिकों के साथ दुर्व्यवहार किया गया. सितंबर में कानपुर में आई लव मोहम्मद लिखे बैनरों पर तीखी प्रतिक्रिया हुई. वहीं बरेली में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प के बाद मौलाना तौकीर रजा खान की गिरफ्तारी ने माहौल को तनावपूर्ण बनाए रखा.

3. मदरसा शिक्षा और 'कामिल-फाजिल' डिग्री का संकट

यूपी सरकार ने मई में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई. इसका काम मदरसों के पाठ्यक्रम और नियुक्तियों में सुधार सुझाना था. सुप्रीम कोर्ट द्वारा कामिल और फाजिल डिग्रियों को यूजीसी एक्ट के खिलाफ बताने के बाद करीब 32000 छात्रों का भविष्य अधर में लटका रहा. हालांकि मदरसा शिक्षक संघ ने इन छात्रों को लखनऊ की भाषा विश्वविद्यालय से संबद्ध करने की गुहार लगाई, लेकिन साल के अंत तक कोई हल नहीं निकल सका.

4. सड़क पर नमाज और सीएम योगी का अनुशासन मंत्र

मार्च में मेरठ पुलिस ने सड़कों पर नमाज पढ़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई (पासपोर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने) की चेतावनी दी. इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोटूक कहा कि सड़कें आवागमन के लिए हैं, नमाज के लिए नहीं. उन्होंने विरोध करने वालों को हिंदुओं से अनुशासन सीखने की सलाह दी.

5. मस्जिद बनाम मंदिर: संभल, बदायूं और धन्नीपुर की हलचल

संभल: शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताने वाले दावे ने कानूनी मोड़ लिया. मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा के बाद जफर अली की गिरफ्तारी और रिहाई के बाद निकले रोड शो ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ाईं.

बदायूं: शम्सी जामा मस्जिद और नीलकंठ महादेव मंदिर विवाद भी कोर्ट में बना रहा. इसकी अगली सुनवाई जनवरी 2026 में तय है.

धन्नीपुर (अयोध्या): सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के बाद मिली जमीन पर मस्जिद का निर्माण फंड की कमी और नक्शों की मंजूरी न मिलने के कारण इस साल भी शुरू नहीं हो सका.

6. नीतीश कुमार के 'हिजाब' विवाद पर सपा नेता का केस

साल के अंत में बिहार के सीएम नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्टर का पर्दा हटाने का मामला यूपी तक पहुंचा. सपा नेता सुमैया राणा ने इस पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. वहीं 28 दिसंबर को लखनऊ के बड़ा इमामबाड़ा में ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अधिवेशन ने साल का समापन किया. बोर्ड ने वक्फ सुधारों पर चर्चा की, UCC का विरोध किया और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की निंदा की. 

एक तरह से देखें तो 2025 उत्तर प्रदेश के लिए सुधार बनाम विरोध का साल रहा. अब 2026 में इन कानूनी लड़ाइयों और सरकारी सुधारों का क्या नतीजा निकलता है, यह देखना दिलचस्प होगा.

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