उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है. यह तीसरी बार है जब SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करने की तारीख टाल दी गई है. बता दें कि चुनाव आयोग ने अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करने की नई तारीख 6 जनवरी 2026 तय की है, जबकि पहले इसे 31 दिसंबर 2025 को प्रकाशित किया जाना था. इस देरी के बीच यह दावा भी सामने आया है कि यूपी में SIR के तहत करीब 2 करोड़ 89 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं. ये राज्य के कुल 15 करोड़ 44 लाख मतदाताओं का लगभग 18-19 प्रतिशत है.
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SIR में ऐसे बढ़ती गई समय-सीमा
जानकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 से देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभियान की शुरुआत की गई थी. इस अभियान के तहत मतदाता सूची का विशेष सत्यापन और सुधार किया जा रहा है. इस प्रक्रिया में समय-सीमा में लगातार बदलाव देखने को मिले हैं. सबसे पहले, नामांकन की लास्ट डेट 4 दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दी गई थी. इसके बाद 11 दिसंबर को उत्तर प्रदेश को अतिरिक्त दो सप्ताह का समय दिया गया और लास्ट डेट 26 दिसंबर 2025 तय की गई. अब तीसरी बार देरी के कारण ड्राफ्ट मतदाता सूची 6 जनवरी 2026 को जारी होने की उम्मीद है.
बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा नाम कटने की संभावना है. वहीं इस सूची में तमिलनाडु लगभग 15% और गुजरात करीब 14.5% वोटरों के नाम हटने के मामले में दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं.
नए पोलिंग बूथ बनने के कारण टली ड्राफ्ट लिस्ट
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि SIR अभियान के दौरान राज्य में 15,030 नए पोलिंग बूथ बनाए गए हैं. इसी वजह से ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी हुई है. उन्होंने बताया कि इन नए बूथों में वोटरों के नाम शिफ्ट किए जाएंगे, उन्हें नए पार्ट नंबर आवंटित किए जाएंगे और BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की तैनाती की जाएगी. इसके अलावा, नई मतदाता सूचियां इन नए बूथों पर भी उपलब्ध कराई जाएंगी. इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 6 जनवरी 2026 को जारी होने की उम्मीद है.
इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट के अनुसार, 23 दिसंबर 2025 को चुनाव आयोग ने 1200 मतदाता प्रति बूथ के आधार पर वोटिंग सेंटर्स के रेशनलाइजेशन का प्रस्ताव मंजूर किया. इससे पहले उत्तर प्रदेश में कुल 1.62 लाख वोटिंग सेंटर थे. साल 2024 में यह प्रक्रिया 1500 वोटर प्रति बूथ के आधार पर की गई थी. इस बार 15030 नए वोटिंग सेंटर जोड़ने के बाद कुल बूथों की संख्या बढ़कर 1.77 लाख हो गई है, जिससे मतदान प्रक्रिया और मतदाता सुविधा को बेहतर बनाया जा सकेगा.
शहरी जिलों में सबसे ज्यादा वोटर डिलीशन
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार शहरी जिलों में वोटर लिस्ट से नाम कटने की संख्या सबसे ज्यादा है. यूपी के सबसे ज्यादा नाम कटने वाले टॉप 10 जिले इस प्रकार हैं:
लखनऊ - 12 लाख (लगभग 30%)
प्रयागराज - 11.56 लाख (24.64%)
कानपुर नगर - 9 लाख (25.5%)
आगरा - 8.36 लाख (23.25%)
गाजियाबाद - 8.18 लाख (28.83%)
बरेली - 7.14 लाख (20.99%)
मेरठ - 6.65 लाख (24.66%)
गोरखपुर - 6.45 लाख (17.61%)
सीतापुर - 6.23 लाख (19.55%)
बड़े शहरों पर सबसे ज्यादा असर
इन आंकड़ों से साफ है कि बड़े शहरों और उनके आसपास के इलाकों में SIR का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है. बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटने की संभावना और ड्राफ्ट रोल में लगातार हो रही देरी के चलते SIR प्रक्रिया एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में आ गई है.
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