यूपी में 98 फीसदी से ज्यादा बच्चों की न्यूट्रीशन मैपिंग हुई, दिखाई दिए ये शानदार नतीजे

Mission Saksham Anganwadi: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने ‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी’ और ‘पोषण 2.0’ के तहत 6 साल तक के 98% से अधिक बच्चों की पोषण मैपिंग पूरी कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. राज्य में 1.89 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं और संस्थागत प्रसव दर 99.97% तक पहुंच गई है.

यूपी तक

• 12:58 PM • 16 Feb 2026

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Mission Saksham Anganwadi: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 'मिशन सक्षम आंगनवाड़ी' और 'पोषण 2.0' के माध्यम से महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 6 साल तक के 98.42% से अधिक बच्चों की पोषण मैपिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. यह आंकड़े न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को दर्शाते हैं, बल्कि राज्य की सुदृढ़ होती सेवा वितरण प्रणाली की तस्दीक भी करते हैं.

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बच्चों के पोषण में 'नंबर 1' की ओर बढ़ता यूपी

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की प्रेस रिलीज के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कुल 1,89,736 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं. राज्य ने 6 साल तक के कुल 1,45,62,081 बच्चों के लक्ष्य में से 1,43,31,611 बच्चों की मैपिंग पूरी कर ली है. इससे अब इन बच्चों की सेहत और खान-पान की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग करना आसान हो गया है.

संस्थागत प्रसव में रिकॉर्ड सफलता

उत्तर प्रदेश ने सुरक्षित मातृत्व की दिशा में भी अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है. राज्य में 99.97% गर्भवती महिलाएं अब संस्थागत प्रसव (अस्पताल में डिलीवरी) का विकल्प चुन रही हैं. गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए 40,580 स्वास्थ्य कर्मियों की एक विशाल टीम तैनात की गई है, जो वर्तमान में 93,65,940 लाभार्थियों को सीधी सेवाएं पहुंचा रही है.

इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प: मिनी सेंटर बने रेगुलर आंगनवाड़ी

राज्य ने अपने बुनियादी ढांचे में बड़ा सुधार करते हुए 22,290 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को अब 'रेगुलर सेंटर्स' में तब्दील कर दिया है. इसके अलावा 23,697 केंद्रों को 'सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र' में अपग्रेड करने की मंजूरी मिल गई है. ये केंद्र बच्चों की शुरुआती शिक्षा और देखभाल की आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे. 

मिशन शक्ति और महिला हेल्पलाइन: महिलाओं का सुरक्षा कवच

उत्तर प्रदेश में 'मिशन शक्ति' के नतीजे बेहद प्रभावी रहे हैं:

वन स्टॉप सेंटर: राज्य के 96 ऑपरेशनल सेंटर्स ने 31 अक्टूबर 2025 तक 2,96,173 महिलाओं की मदद की है. इनमें से अधिकांश सरकारी और नवनिर्मित इमारतों में चल रहे है
महिला हेल्पलाइन (181/112): इस सपोर्ट सिस्टम ने 31 दिसंबर 2025 तक 9,18,860 महिलाओं को आपातकालीन सहायता पहुंचाई है. इसे अब इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम के साथ इंटीग्रेट कर दिया गया है.

कामकाजी महिलाओं और बच्चों के लिए नई सुविधाएं

वर्किंग वुमन हॉस्टल: कामकाजी महिलाओं के लिए 4,000 बेड वाले 8 नए हॉस्टल को मंजूरी मिली है. इसके लिए केंद्र सरकार ने ₹381.56 करोड़ का बजट आवंटित किया है, जिसमें से ₹251.83 करोड़ जारी किए जा चुके हैं.

शक्ति सदन और सखी निवास: सामर्थ्य योजना के तहत 10 नए शक्ति सदन बनाए जा रहे हैं. वर्तमान में 8 सखी निवास (वर्किंग वुमन हॉस्टल) पहले से ही कार्य कर रहे हैं.

मिशन वात्सल्य: कमजोर बच्चों के लिए राज्य के सभी 75 जिलों में 191 चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन चल रहे हैं, जहाँ 5,125 बच्चों की देखभाल की जा रही है.

हर जिले में सशक्त प्रशासन

केंद्र सरकार ने सराहना करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में महिला एवं बाल विकास कार्यालय शत-प्रतिशत संचालित हैं. 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' और 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' जैसी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से समाज के सबसे निचले तबके तक स्वास्थ्य और पोषण की सुविधाएं पहुंच रही हैं. ढांचागत सुधारों और सेवा व्यवस्था को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों ने यूपी को स्वास्थ्य और पोषण के मामले में एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित कर दिया है.

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