UP News: यूपी Tak के खास शो आज का यूपी में हम राज्य की तीन बड़ी और महत्वपूर्ण खबरों का गहन विश्लेषण करते हैं. आज के अंक में सबसे बड़ी खबर उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों को लेकर है, जिनके अब विधानसभा चुनाव तक टलने के आसार नजर आ रहे हैं. वहीं, सियासी गलियारों में हलचल तेज है क्योंकि बीएसपी के पूर्व दिग्गज नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी और पीलीभीत के कद्दावर नेता अनीस अहमद 'फूल बाबू' ने समाजवादी पार्टी का दामन थामने के संकेत दिए हैं. आज हम समझेंगे कि आखिर क्यों बड़े मुस्लिम चेहरे अखिलेश यादव के साथ जुड़ने को बेताब हैं और पंचायत चुनाव टलने के पीछे के असल कानूनी और राजनीतिक कारण क्या हैं.
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यूपी पंचायत चुनाव पर ब्रेक! अब अगले साल तक टलने की उम्मीद
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है. चर्चा थी कि ये चुनाव आने वाले महीनों में संपन्न हो जाएंगे, लेकिन अब ताजा घटनाक्रम के अनुसार ये चुनाव विधानसभा चुनाव तक टलते नजर आ रहे हैं.
इस देरी के पीछे का मुख्य कारण 'पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन न होना है. दरअसल, पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में ही समाप्त हो गया था और नियमानुसार हर 3 साल में इसका गठन अनिवार्य है. इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही सीटों का आरक्षण तय होता है. अदालत में दाखिल एक जनहित याचिका के बाद सरकार ने हलफनामा देकर स्वीकार किया है कि वह जल्द ही आयोग का गठन करेगी. आयोग के गठन, सर्वे और आरक्षण प्रक्रिया में कम से कम 4 से 6 महीने का समय लगेगा. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कोई भी दल विधानसभा चुनाव से ऐन पहले पंचायत चुनाव का 'सिर-फुटव्वल' और गुटबाजी नहीं झेलना चाहता, इसलिए इस देरी को एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में एंट्री, बुंदेलखंड और वेस्ट यूपी में बढ़ेगी ताकत
बहुजन समाज पार्टी के कभी सबसे कद्दावर नेता रहे और मायावती के बेहद करीबी माने जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब समाजवादी पार्टी का हिस्सा बनने जा रहे हैं. कांग्रेस में पिछले 8-9 साल बिताने के बाद सिद्दीकी ने संकेत दिए हैं कि उनकी अखिलेश यादव से बातचीत अंतिम दौर में है.
सिद्दीकी का सपा में आना अखिलेश यादव के लिए एक 'विन-विन' सिचुएशन माना जा रहा है. मूल रूप से बांदा के रहने वाले सिद्दीकी का प्रभाव बुंदेलखंड के साथ-साथ मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी है. वे अपने साथ समर्थकों की एक बड़ी फौज लेकर आ रहे हैं. हालांकि, वे अखिलेश यादव से अपने परिवार और करीबियों के लिए कुछ सीटों का ठोस वादा चाहते हैं. सपा को उम्मीद है कि सिद्दीकी के आने से मुस्लिम वोट बैंक के साथ-साथ बसपा का पुराना कैडर भी उनके पाले में आ सकता है.
पीलीभीत के फूल बाबू भी थामेंगे अखिलेश का हाथ
समाजवादी पार्टी के कुनबे में शामिल होने वाला दूसरा बड़ा नाम अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू का है. पीलीभीत की बीसलपुर सीट से कई बार विधायक और मंत्री रहे फूल बाबू का अपने क्षेत्र में मजबूत व्यक्तिगत वोट बैंक माना जाता है.
पीलीभीत के इलाके में जहां समाजवादी पार्टी पारंपरिक रूप से कमजोर रही है, वहां फूल बाबू के आने से पार्टी को संजीवनी मिल सकती है. चर्चा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी और फूल बाबू दोनों ही 15 तारीख को आधिकारिक तौर पर सपा की सदस्यता ले सकते हैं. इन नेताओं के लिए भी सपा में जाना अब सर्वाइवल की जरूरत बन गया है क्योंकि बसपा और कांग्रेस में उनकी राजनीतिक जमीन खिसकती नजर आ रही थी. माना जा रहा है कि अखिलेश यादव की रणनीति पुराने और अनुभवी बसपा नेताओं को जोड़कर अपने सामाजिक समीकरण को और पुख्ता करने की है.
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