कौन हैं आशुतोष ब्रह्मचारी जिन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाए हैं घिनौने आरोप?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण का आरोप. रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने पॉक्सो कोर्ट में दी चुनौती. जानें क्या है माघ मेले से शुरू हुए इस विवाद का पूरा सच.

आशुतोष ब्रह्मचारी

सुषमा पांडेय

12 Feb 2026 (अपडेटेड: 12 Feb 2026, 09:24 PM)

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UP News: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर बड़े विवादों के केंद्र में हैं. माघ मेले में पुलिस के साथ हुई झड़प के बाद अब उन पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगे हैं. जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य पर नाबालिग बच्चों के यौन शोषण और कुकर्म जैसे संगीन आरोप लगाते हुए प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. 

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कौन हैं आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी?

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य हैं और श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं. शामली के एक पंडित परिवार में जन्मे आशुतोष के पिता रोडवेज बस में कंडक्टर थे. 2022 में रामभद्राचार्य से दीक्षा लेने के बाद वे सन्यासी जीवन जी रहे हैं. वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले में मुख्य पक्षकार भी हैं. 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर क्या आरोप लगाए गए हैं?

रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का दावा है कि माघ मेले के दौरान उन्हें दो बच्चे मिले, जिन्होंने शंकराचार्य के शिविर में अपने साथ हुए यौन शोषण की आपबीती सुनाई. आशुतोष ब्रह्मचारी का आरोप है कि शंकराचार्य के एक शिष्य मुकुंदानंद के जरिए बच्चों को गुरु सेवा के नाम पर गुमराह किया जाता था और उनके साथ कुकर्म किया जाता था. उन्होंने यह भी दावा किया है कि उनके पास इस घिनौने कृत्य की एक सीडी साक्ष्य के तौर पर मौजूद है, जिसे वे कोर्ट में पेश करेंगे.

अविमुक्तेश्वरानंद ने किया ये पलटवार

इन आरोपों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है. उन्होंने कहा कि उनके विरुद्ध एक 'कार्टेल' (दूषित मानसिकता वाला समूह) काम कर रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार भी कहीं न कहीं सम्मिलित दिखाई दे रही है.  शंकराचार्य के अनुसार, गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए वे जो मुहिम चला रहे हैं, उससे कुछ लोग बौखलाए हुए हैं.  उन्होंने कहा, "जब विरोधी हमें शास्त्रीय प्रश्नों और कानूनी दांव-पेचों में नहीं फंसा सके, तो अब इस तरह के नीच और घृणित आरोपों का सहारा ले रहे हैं."

क्या है विवाद?

इस पूरे विवाद की शुरुआत 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान हुई थी. आरोप है कि पुलिस ने शंकराचार्य को स्नान के लिए जाने से रोका और उनके भक्तों के साथ बदसलूकी की। इसके बाद शंकराचार्य कई दिनों तक शिविर के बाहर धरने पर बैठे रहे. इसी दौरान रामभद्राचार्य ने उन्हें 'फर्जी शंकराचार्य' बताते हुए हमला बोला था, जिससे दोनों संतों के बीच पुरानी अदावत और गहरा गई. 

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