Who is Manoj Yadav: उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव को 13 फरवरी 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. सफदरगंज पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है. मनोज यादव पर एक महिला के साथ गाली-गलौज और विवाद के मामले में 11 फरवरी को केस दर्ज किया गया था जिसकी जांच के बाद पुलिस ने यह कदम उठाया है.
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कौन हैं मनोज यादव?
मनोज यादव मूल रूप से बाराबंकी जिले के सफदरगंज थाना क्षेत्र के भागोलपुरवा गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता मंडी समिति में सरकारी कर्मचारी थे. परिवार का राजनीति से कोई पुराना वास्ता नहीं रहा है. ग्रामीणों के अनुसार मनोज ने ठाकुर समाज की एक युवती से प्रेम विवाह किया था. शादी के बाद वे लखनऊ शिफ्ट हो गए और वहां लकड़ी का व्यवसाय शुरू किया. इसी दौरान उनका समाजवादी पार्टी के दफ्तर में आना-जाना बढ़ा. धीरे-धीरे संगठन में उनकी पकड़ मजबूत हुई और पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ताओं के पैनल में शामिल कर लिया.
विवादों से रहा है पुराना नाता
राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने के बाद मनोज यादव मीडिया डिबेट्स में एक चर्चित चेहरा बन गए. लेकिन उनकी पहचान अक्सर उनके विवादित बयानों से जुड़ी रही. हाल ही में क्षत्रिय समाज के खिलाफ उनकी एक कथित टिप्पणी ने काफी तूल पकड़ा था.सूत्रों की मानें तो उनके ऐसे बयानों से सपा प्रमुख अखिलेश यादव और पार्टी नेतृत्व काफी असहज था. चर्चा है कि विवादों के चलते पार्टी ने पहले ही उनसे दूरी बनाना शुरू कर दिया था. हालांकि अधिकारिक तौर पर इस पर कोई बयान सामने नहीं आया है.
क्यों हुई गिरफ्तारी?
पुलिस के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई एक महिला द्वारा दी गई तहरीर पर आधारित है. पीड़िता ने मनोज यादव पर गाली-गलौज और गंभीर विवाद का आरोप लगाया था. सफदरगंज पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर धाराएं दर्ज कीं और 13 फरवरी को उन्हें गिरफ्तार कर लिया. चूंकि मनोज यादव एक हाई-प्रोफाइल पार्टी पद पर रहे हैं. इसलिए उनकी गिरफ्तारी को लेकर विपक्षी दल हमलावर हैं. समाजवादी पार्टी की ओर से इस मामले में अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर संशय बना हुआ है.
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