UP News: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है. अब जो अपडेट सामने आया है वो उम्मीदवारों को मायूस कर सकता है. चर्चा थी कि ये चुनाव जुलाई 2026 से पहले या आने वाले महीनों में संपन्न हो जाएंगे. लेकिन ताजा घटनाक्रम के अनुसार अब ये चुनाव 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव तक चलते नजर आ रहे हैं. इस देरी के कारण अब उम्मीदवारों को एक लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.
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देरी के पीछे क्या है मुख्य कारण?
इस देरी के पीछे का मुख्य कारण पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना है. नियमानुसार हर 3 साल में इस आयोग का गठन अनिवार्य है और इसका कार्यकाल अक्टूबर 2025 में ही समाप्त हो गया था. इसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सीटों का आरक्षण तय किया जाता है. अदालत में दाखिल एक जनहित याचिका के बाद सरकार ने हलफनामा देकर स्वीकार किया है कि वह जल्द ही आयोग का गठन करेगी. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया (गठन, सर्वे और आरक्षण) में कम से कम 4 से 6 महीने का समय लगेगा.
सियासी गलियारों में चर्चा है कि कोई भी दल विधानसभा चुनाव से ऐन पहले पंचायत चुनाव की गुटबाजी और सिर-फुटव्वल का जोखिम नहीं उठाना चाहता. इसलिए इस देरी को एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. यही वजह है कि अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अब अगले साल विधानसभा चुनाव के बाद ही हो सकेंगे.
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