उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही से सब इंस्पेक्टर (SI) बनने का सपना देख रहे करीब 1,700 पुलिसकर्मियों के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है. SI भर्ती परीक्षा पास करने के बाद भी उनकी जॉइनिंग आसान नहीं दिख रही है. वजह है विभाग की ओर से ट्रेनिंग पर खर्च रकम और नौकरी के दौरान मिले वेतन की वापसी का मामला.
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इन पुलिसकर्मियों का कहना है कि उन्होंने विभाग की अनुमति लेकर ही सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा दी, परीक्षा पास की और अब सिपाही की नौकरी छोड़कर विभाग में ही ऊंचे पद पर जाना चाहते हैं, लेकिन जॉइनिंग से पहले उनसे बड़ी रकम जमा करने को कहा जा रहा है. अब इन अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से राहत की गुहार लगाई है.
मामला सिर्फ नौकरी बदलने का नहीं है. सवाल है कि एक ही विभाग में सिपाही से SI बनने के लिए सफल हुए पुलिसकर्मी क्या ट्रेनिंग और वेतन की लाखों रुपये की रकम वापस करने की स्थिति में हैं?
60,244 पदों की भर्ती से आए थे ये सिपाही
दरअसल, वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश पुलिस में 60,244 सिपाहियों की भर्ती हुई थी. इन चयनित अभ्यर्थियों की ट्रेनिंग 17 जून 2025 से 26 अप्रैल 2026 तक चली. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अप्रैल 2026 से ये अपने-अपने जिलों में व्यवहारिक ड्यूटी कर रहे हैं.
इसी दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस में 4,543 पदों पर सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा आयोजित हुई. इस परीक्षा में सफल होने वाले करीब 1,700 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जो पहले से ही उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही हैं. इन पुलिसकर्मियों ने एक बार फिर परीक्षा पास कर विभाग में ही ऊंची जिम्मेदारी हासिल की है, लेकिन अब उनके सामने SI पद पर जॉइनिंग से पहले पैसे जमा करने की शर्त सामने आ गई है.
7 लाख 34 हजार रुपये की रकम कहां से आई?
अभ्यर्थियों के मुताबिक, विभाग की अनुमति लेकर SI भर्ती परीक्षा में शामिल होने के बाद उन्हें अब सिपाही के रूप में मिली ट्रेनिंग और वेतन की रकम लौटाने को कहा जा रहा है. उनका दावा है कि ट्रेनिंग पर खर्च 2,70,982 रुपये और 17 जून 2025 से 31 अगस्त 2026 तक मिला वेतन 4,63,150 रुपये बताया गया है.
दोनों रकम को जोड़ें तो कुल 7,34,132 रुपये बैठते हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि SI की जॉइनिंग से पहले इतनी बड़ी रकम जमा करना उनके लिए व्यावहारिक नहीं है.
जिलों से जारी हो रहे नोटिस
SI के पद पर जाना चाहने वाले ऐसे सिपाहियों को उनके जिलों के पुलिस कप्तान की ओर से नोटिस दिए जा रहे हैं. इसी वजह से अब बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी परेशानी लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंच रहे हैं.
2025 बैच के चयनित आरक्षियों की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वे नियमों के तहत सक्षम अधिकारी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने के बाद ही SI भर्ती परीक्षा में शामिल हुए थे. पत्र में इन अभ्यर्थियों ने अपनी समस्या बताते हुए ट्रेनिंग और वेतन की रकम वापस करने की शर्त से राहत देने की मांग की है.
अभ्यर्थियों की दलील- हम पुलिस विभाग छोड़ ही नहीं रहे
इन सिपाहियों की सबसे बड़ी दलील यही है कि वे उत्तर प्रदेश पुलिस की नौकरी छोड़कर किसी दूसरे विभाग में नहीं जा रहे हैं. वे सिर्फ परीक्षा पास करने के बाद उसी पुलिस विभाग में ऊंचे पद पर नियुक्त होना चाहते हैं.
उनका कहना है कि सिपाही के तौर पर मिली ट्रेनिंग भी आगे पुलिस विभाग के ही काम आएगी. ऐसे में ट्रेनिंग और वेतन की पूरी रकम वापस मांगना उनके लिए भारी आर्थिक बोझ है.
अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उन्हें इस भुगतान से पूरी तरह मुक्त या छूट देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं. उनका कहना है कि ऐसा होने पर वे बिना इस आर्थिक संकट के SI पद पर जॉइन कर सकेंगे.
नियम क्या कहता है?
हालांकि, पुलिस विभाग में ऐसा नियम है कि दो साल के भीतर नौकरी छोड़ने पर ट्रेनिंग और वेतन पर खर्च हुई रकम वापस करनी होती है. विभाग इसी नियम के तहत रकम की वापसी की बात कर रहा है, लेकिन इन अभ्यर्थियों का तर्क है कि उनका मामला सामान्य तौर पर नौकरी छोड़ने का नहीं है.
वे उत्तर प्रदेश पुलिस से अलग नहीं हो रहे, बल्कि विभागीय अनुमति लेकर चयन प्रक्रिया में शामिल हुए और अब उसी विभाग में प्रमोशनल स्तर की नई भूमिका में जाना चाहते हैं. यही वह पेच है जिस पर अब पुलिस मुख्यालय में भी मंथन चल रहा है.
पुलिस मुख्यालय में भी चल रहा मंथन
मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले को लेकर पुलिस मुख्यालय पर भी विचार-विमर्श जारी है. मामला इसलिए भी स्पेशल है क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में सिपाहियों ने एक साथ SI भर्ती परीक्षा पास की है और अब वे विभाग के भीतर ही दूसरे पद पर जॉइन करना चाहते हैं.
एक तरफ नियम के तहत रकम की वापसी का सवाल है तो दूसरी तरफ 1,700 के करीब सफल सिपाहियों का भविष्य जुड़ा है. ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और पुलिस मुख्यालय इस मामले में क्या रास्ता निकालते हैं.
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