यूपी की मतदाता लिस्ट में 16.18 लाख 'रहस्यमयी वोटर' का क्या है सच? चुनाव आयोग ने दी सफाई

यूपी तक

• 10:20 AM • 07 Oct 2026

उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-2026 (SIR) के दौरान 16.18 लाख 'रहस्यमयी वोटर' जोड़े जाने की खबरों को उत्तर प्रदेश मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भ्रामक बताया है.

UP 16.18 lakh Voters News

UP 16.18 lakh Voters News (Photo AI Generated)

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UP 16.18 lakh Voters News: उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-2026 (SIR) के दौरान 16.18 लाख 'रहस्यमयी वोटर' जोड़े जाने की खबरों को उत्तर प्रदेश मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भ्रामक बताया है. 6 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि सोशल मीडिया पर इस तरह की खबर प्रसारित कर भ्रम फैलाया गया है. विभाग के मुताबिक, SIR की पूरी प्रक्रिया आयोग के निर्देशों के अनुसार पूरी की गई है. विभाग ने प्रसारित खबरों में लगाए गए आरोपों को तथ्यहीन और मिथ्या धारणाओं पर आधारित बताते हुए खारिज कर दिया है. खबर में अब आप आसान भाषा में पूरा मामला समझिए.
 
16.18 लाख फॉर्म-6 को लेकर क्या है पूरा मामला?

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निर्वाचन विभाग के मुताबिक, 6 जनवरी 2026 को आलेख्य मतदाता सूची (ड्राफ्ट) प्रकाशित होने से पहले 27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026 तक SIR का प्रोसेस चला था. जिन लोगों के नाम पहले से वोटर लिस्ट में नहीं थे और जो वोटर बनने के योग्य थे, उन्हें Form-6 दिया गया. ऐसे करीब 16.18 लाख Form-6 BLO ने लोगों से लेकर जमा किए. 

क्या 16.18 लाख नाम वोटर लिस्ट में जोड़ दिए गए?

खबरों में 16.18 लाख 'रहस्यमयी वोटर' जोड़े जाने की बात कही गई थी. निर्वाचन विभाग ने इस दावे को गलत बताया है. विभाग के अनुसार ये संख्या उन फॉर्म-6 की है, जिन्हें गणना चरण के दौरान पात्र नागरिकों से लिया गया था. विभाग के अनुसार, 16.18 लाख फॉर्म-6 लिए जाने को सीधे तौर पर इतने नए नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाने के रूप में नहीं देखा जा सकता. यानी 16.18 लाख Form-6 जमा हुए. इसका मतलब यह नहीं है कि 16.18 लाख नए वोटर वोटर लिस्ट में जोड़ दिए गए. 

फिर इन 16.18 लाख नामों की लिस्ट वेबसाइट पर क्यों नहीं दिखी?

यहां चुनाव आयोग की सफाई है कि 6 जनवरी 2026 को जो ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई, उसमें दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के बाद मिले Form-6 की जानकारी वेबसाइट पर Form-9 के रूप में दिखाई गई. पहले से गणना के दौरान जमा हुए Form-6 को उसी तरह वेबसाइट पर दिखाना जरूरी नहीं था, क्योंकि वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया में एक तय समय पर रिकॉर्ड को फ्रीज कर दिया जाता है. विभाग के अनुसार इस प्रक्रिया में कानून, नियमों और आयोग के निर्देशों के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं हुआ.

क्या Form-6 देने वाले सभी लोगों के नाम वोटर लिस्ट में जुड़ गए?

नहीं. आयोग का कहना है कि Form-6 जमा करने का मतलब नाम का अपने आप वोटर लिस्ट में जुड़ जाना नहीं है. हर Form-6 की नियमों के मुताबिक जांच होती है. जांच के बाद ही यह तय होता है कि नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा या नहीं.

Form-6 स्वीकार करने का कोई तय प्रतिशत है?

आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रहे इस दावे को भी गलत बताया है. उसका कहना है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि Form-6 में से एक निश्चित प्रतिशत आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे. हर आवेदन की जांच के बाद नियमानुसार फैसला लिया जाता है.

निर्वाचन विभाग बोला- प्रक्रिया में सभी दलों की भागीदारी

विभाग  ने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-2026 का काम कानून के अनुसार पारदर्शी और सहभागी तरीके से पूरा कराया गया.  इस पूरी प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी रही. प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में SIR के संबंध में अब तक किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति ने इस तरह का कोई आरोप नहीं लगाया है. निर्वाचन विभाग ने सोशल मीडिया पर 16.18 लाख 'रहस्यमयी वोटर' जोड़ने से जुड़ी खबर को भ्रामक बताते हुए कहा कि यह दावा उपलब्ध प्रक्रिया और तथ्यों से मेल नहीं खाता है.

अब सबसे आसान भाषा में पूरी बात 30 सेकेंड में समझिए

सोशल मीडिया पर दावा: यूपी की वोटर लिस्ट में 16.18 लाख रहस्यमयी वोटर जोड़ दिए गए.

चुनाव आयोग की सफाई: SIR के दौरान 16.18 लाख लोगों के Form-6 मिले थे. ये ऐसे लोग थे जिनके नाम उस समय की वोटर लिस्ट में नहीं थे और जिन्होंने नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया था. इन सभी को सीधे वोटर नहीं मान लिया गया. आवेदन की जांच के बाद ही नाम जोड़ने का फैसला होता है.

एक लाइन में: 16.18 लाख Form-6 जमा होना और 16.18 लाख नए वोटर जुड़ जाना दो अलग-अलग बातें हैं.