राशन की दुकान पर जाते समय अगर ई-पॉस मशीन पर आपका अंगूठा मैच नहीं हुआ तो घबराने की जरूरत नहीं है. सिर्फ बायोमेट्रिक फेल होने की वजह से किसी पात्र लाभार्थी का राशन रोका नहीं जा सकता है. केंद्र के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने साफ किया है कि तकनीकी वजह से फिंगरप्रिंट मैच न होने पर पहचान की पुष्टि के दूसरे तरीके इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
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यह जानकारी उत्तर प्रदेश के उन राशन कार्डधारकों के लिए भी खास तौर पर काम की है, जो हर महीने सरकारी राशन की दुकान से गेहूं, चावल या योजना के तहत मिलने वाला खाद्यान्न लेते हैं. यूपी में भी राशन वितरण व्यवस्था ई-पॉस मशीन और आधार आधारित प्रमाणीकरण से जुड़ी है.
उत्तर प्रदेश को वन नेशन वन राशन कार्ड व्यवस्था में मई 2020 में शामिल किया गया था. वन नेशन वन राशन कार्ड क्या है? इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रवासी मजदूरों और जरूरतमंदों को देश या राज्य के किसी भी हिस्से में उचित मूल्य की दुकान से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए आसानी से राशन उपलब्ध कराना है।
अंगूठा मैच नहीं हुआ तो सबसे पहले क्या समझें?
मान लीजिए आप राशन लेने दुकान पर पहुंचे. दुकानदार ने ई-पॉस मशीन पर आपका फिंगरप्रिंट लिया, लेकिन मशीन ने उसे मैच नहीं किया. इसकी वजह हमेशा यह नहीं होती कि आपका राशन कार्ड गलत है या आप राशन लेने के पात्र नहीं हैं.
कभी-कभी उंगली के निशान साफ नहीं आने, बायोमेट्रिक में दिक्कत, नेटवर्क या कनेक्टिविटी की समस्या और दूसरी तकनीकी वजहों से ऑथेंटिकेशन फेल हो सकता है. केंद्र सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के मुताबिक, ऐसी स्थिति में पात्र लाभार्थी को खाद्यान्न देने से इनकार नहीं किया जाना चाहिए.
फिर पहचान कैसे होगी?
अगर फिंगरप्रिंट से पहचान नहीं हो पा रही है तो दूसरे विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं. विभाग की जानकारी के मुताबिक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फिंगरप्रिंट के अलावा आइरिस यानी आंख की पुतली आधारित बायोमेट्रिक व्यवस्था का विकल्प भी रखने की सलाह दी गई है.
इसके अलावा आधार OTP या PDS OTP के जरिए भी लाभार्थी की पहचान की पुष्टि की जा सकती है. मतलब है कि जिस स्थिति में मशीन अंगूठे से पहचान नहीं कर पा रही है, वहां दूसरे उपलब्ध माध्यम से ऑथेंटिकेशन किया जा सकता है.
सिर्फ OTP ही नहीं, दूसरे दस्तावेज भी काम आ सकते हैं
किसी तकनीकी वजह से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण सफल नहीं होता तो वैकल्पिक पहचान दस्तावेज के जरिए भी पात्रता की पुष्टि की जा सकती है. विभाग की आधिकारिक जानकारी में ऐसे मामलों के लिए वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों का प्रावधान बताया गया है. इनमें वोटर आईडी, पैन कार्ड, वैध पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस समेत निर्धारित दस्तावेज शामिल हैं.
मतलब है कि राशन लेने के लिए अगर आपका अंगूठा किसी दिन मशीन पर मैच नहीं करता, तो सिर्फ इसी आधार पर आपको खाली हाथ लौटना जरूरी नहीं है. वैकल्पिक प्रमाणीकरण व्यवस्था के जरिए आपकी पहचान की पुष्टि की जा सकती है.
यूपी के राशन कार्डधारकों के लिए क्यों जरूरी है जानकारी?
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवार सरकारी राशन व्यवस्था पर निर्भर हैं. राशन की दुकान पर आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन अब रोजमर्रा की प्रक्रिया का हिस्सा है. इसलिए बुजुर्गों, मजदूरों और उन लोगों के लिए यह जानकारी खास मायने रखती है जिनकी उंगलियों के निशान मशीन पर कई बार ठीक से नहीं आते.
खासकर उम्र बढ़ने के साथ उंगलियों के निशान को लेकर दिक्कत आ सकती है. कामकाज के कारण हाथों की त्वचा पर असर पड़ने से भी फिंगरप्रिंट पढ़ने में परेशानी हो सकती है. ऐसी स्थिति में केवल मशीन पर अंगूठा न मिलने को राशन की पात्रता खत्म होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
केंद्र के आधिकारिक दिशा-निर्देशों में भी कहा गया है कि बायोमेट्रिक फेल होने, नेटवर्क या कनेक्टिविटी की समस्या या अन्य तकनीकी कारणों से वास्तविक पात्र लाभार्थी को खाद्यान्न से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.
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