त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनकड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत चर्चा में बनी हुई है. अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में उनका शव मिलने के बाद शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है. हालांकि इस घटना ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत के रहने वाले अनुराग धनकड़ के पार्थिव शरीर का बड़ौत में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया है. लेकिन अंतिम विदाई के बीच उनकी मौत को लेकर परिजनों और करीबियों द्वारा उठाए गए सवालों ने निष्पक्ष जांच की मांग को तेज कर दिया है.
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इतना मजबूत अधिकारी सुसाइड नहीं कर सकता-परिजनों का बड़ा बयान
अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों और करीबी लोगों के बीच केवल एक ही चर्चा रही कि क्या यह वाकई आत्महत्या है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश? अनुराग धनकड़ के फुफेरे भाई उपेंद्र धनकड़ ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा 'इतने बड़े पद तक पहुंचने वाला और मजबूत इरादों वाला अधिकारी आत्महत्या नहीं कर सकता. इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी चाहिए.'
इस दौरान परिजनों ने ध्यान दिलाया कि अनुराग धनकड़ ने अपने पूरे करियर में देश के कई बड़े घोटालों और अति-संवेदनशील मामलों की जांच की थी. ऐसे में उनकी अचानक हुई मौत को केवल सुसाइड मान लेना जल्दबाजी होगी. परिवार की मांग है कि मामले की हर पहलू से निष्पक्ष जांच हो ताकि सच्चाई सामने आ सके.
आर्मी या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए जांच
अनुराग धनकड़ के करीबियों और स्थानीय लोगों ने भी घटना पर गहरा संदेह जताया है. करीबियों का कहना था कि जब एक साधारण सिपाही की संदिग्ध मौत पर पूरे महकमे से जवाब मांगा जाता है तो राज्य के DGP की संदिग्ध मौत पर इतनी खामोशी क्यों? उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या फिर आर्मी जैसी निष्पक्ष संस्था से कराई जानी चाहिए ताकि किसी भी तरह का संदेह न रहे और दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.
बड़ौत में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
अनुराग धनकड़ मूल रूप से बागपत के बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे. उनके छोटे भाई रविराज धनकड़ बड़ौत में रहते हैं. जब उनका पार्थिव शरीर बड़ौत पहुंचा तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई. बड़ौत में पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने वरिष्ठ अधिकारी को अंतिम सलामी दी. इस दौरान यूपी सरकार के राज्यमंत्री असीम अरुण, विधायक केपी मलिक, पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त व पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह समेत त्रिपुरा पुलिस और यूपी पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
जांच पर टिकीं देश की निगाहें
एक ओर जहां पुलिस प्रशासन शुरुआती साक्ष्यों के आधार पर इसे आत्महत्या का मामला मानकर कार्रवाई कर रहा है. वहीं परिजनों की निष्पक्ष जांच की मांग ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है. अब देखना यह होगा कि त्रिपुरा सरकार और गृह मंत्रालय इस हाई-प्रोफाइल मामले में क्या कदम उठाते हैं.
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