CM योगी की भूमिका पर खुलकर बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, धमकियों के दावे पर भी किया खुलासा

Swami Avimukteshwaranand News: गोरखपुर में रविवार को गोविष्टि यात्रा की शुरुआत के साथ ही धार्मिक और राजनीतिक माहौल गर्म हो गया. भारत माता मंदिर, सहारा स्टेट के सामने आयोजित कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई.

CM Yogi Adityanath and Swami Avimukteshwaranand File photo

UP News: गोरखपुर में रविवार को गोविष्टि यात्रा की शुरुआत के साथ ही धार्मिक और राजनीतिक माहौल गर्म हो गया. भारत माता मंदिर, सहारा स्टेट के सामने आयोजित कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई. इस दौरान उन्होंने गाय संरक्षण, सरकार की नीतियों, चुनावी राजनीति और सामाजिक सोच को लेकर कई बड़े सवाल उठाए. उनके भाषण में नाराजगी, चेतावनी और जनजागरण का संदेश साफ दिखाई दिया. अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि गोविष्टि यात्रा शुरू करने से पहले उन्हें कई तरह की धमकियां मिली थीं. लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा, 'कोई भी हमें डरा नहीं सकता. अगर किसी ने ऐसा करने की कोशिश की तो उसे सत्ता से बाहर होना पड़ेगा.' उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इसलिए डराया जा रहा है क्योंकि वे जनता के असली मुद्दों को उठा रहे हैं.

साथ ही मुख्यमंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उन्हें इस मुद्दे पर कमजोर बताया. उनके अनुसार, अगर इच्छाशक्ति होती तो गाय को 'राज्यमाता' घोषित किया जा सकता था. उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के कारण सरकार इस दिशा में सख्त फैसले नहीं ले रही है.

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उन्होंने बताया कि इस यात्रा का मकसद देशभर में गाय की रक्षा और उसके सम्मान को लेकर लोगों को जागरूक करना है. उनके अनुसार, गाय भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. उन्होंने कहा कि लोग गाय को माता कहते हैं, लेकिन व्यवहार में उसका सम्मान नहीं करते. इस यात्रा के जरिए वे गांव-गांव जाकर गोरक्षा को जनआंदोलन बनाने की कोशिश करेंगे.

सरकार पर उठाए सवाल

शंकराचार्य ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार सच में हिंदू हितों के लिए काम करती, तो अब तक गाय की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जा चुके होते. उन्होंने सवाल किया कि जब दूसरे देशों में धार्मिक भावनाओं का सम्मान होता है, तो भारत में गोमाता की रक्षा की मांग को क्यों नजरअंदाज किया जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि देश में कई कानून ऐसे हैं जो हिंदू समाज के खिलाफ हैं. साथ ही वोट बैंक की राजनीति पर हमला बोलते हुए कहा कि राजनीतिक दल फैसले जनता के हित में नहीं, बल्कि चुनावी फायदे के आधार पर लेते हैं.

शंकराचार्य ने लोगों से लोकतंत्र की ताकत समझने और मतदान का सही उपयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि असली ताकत जनता के पास है और वही सरकार बनाती है. अगर जनता चाहे तो गोरक्षा जैसे मुद्दे को प्राथमिकता में ला सकती है. शंकराचार्य ने लोगों से 'एक वोट, एक नोट' का संकल्प लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में गोरक्षा के लिए 'रामाधाम' बनाए जाएंगे और इसके लिए जनसमर्थन जरूरी है.

सामूहिक आंदोलन और राजनीति से दूरी

शंकराचार्य ने बताया कि यह यात्रा 81 दिनों तक चलेगी, जिसमें 81 तरह के संघर्षों की बात की जाएगी. इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और एक बड़ा आंदोलन खड़ा करना है. उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल उनका नहीं, बल्कि चारों शंकराचार्यों की संयुक्त आवाज है. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और वे केवल धर्म और समाज के हित में काम कर रहे हैं. गोरखपुर से शुरू हुई यह गोविष्टि यात्रा अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है. आने वाले समय में इसका क्या असर पड़ेगा, इस पर सभी की नजर रहेगी.