नोएडा DM मेधा रूपम की अर्जी पर SC में सुनवाई पूरी, सैलरी से 5 लाख मुआवजा कटने के HC के आदेश को दी थी चुनौती

यूपी तक

• 04:17 PM • 23 Sep 2026

नोएडा की डीएम मेधा रूपम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 23 सितंबर 2026 को सुनवाई पूरी हुई और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत से जुड़ा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिरासत रद्द करते हुए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने और यह रकम मेधा रूपम के वेतन से वसूलने का निर्देश दिया था.

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नोएडा में मजदूरों और छात्रों के आंदोलन के दौरान कार्रवाई के मामले में नोएडा की डीएम मेधा रूपम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. 

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मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कथित अवैध हिरासत में रखने के मामले में उनके वेतन से 5 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर वसूलने का निर्देश दिया गया था.

मेधा रूपम की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि डीएम को कोई नोटिस दिए बिना उनके खिलाफ सख्त टिप्पणियां की गईं. उन्होंने कहा कि 5 लाख रुपये की रकम उनके वेतन से काटने का निर्देश दिया गया और इस मामले का उल्लेख उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में भी किया गया.

'डीएम की भूमिका बाकी अधिकारियों से अलग'

तुषार मेहता ने कहा कि हिरासत के आदेश को रद्द करना एक अलग बात है, लेकिन आदेश जारी करने वाले अधिकारी पर व्यक्तिगत आक्षेप लगाना या उसकी आलोचना करना अलग विषय है. उन्होंने दलील दी कि डीएम किसी मामले में सीधे अपनी राय नहीं बनाते. उनके सामने निर्णय लेने से पहले कई प्रशासनिक स्तर और प्रक्रियाएं होती हैं.

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से पेश मुकुल रोहतगी ने भी हाईकोर्ट के आदेश को अनुचित बताया. उन्होंने कहा कि जिला अधिकारी की ओर से सॉलिसिटर जनरल सुप्रीम कोर्ट में मौजूद हैं और इस आदेश को चुनौती दी जा रही है.

छात्रा पर क्या आरोप बताए गए?

मुकुल रोहतगी ने अदालत में कहा कि हिरासत में ली गई छात्रा पर पहले उपद्रव भड़काने का आरोप था. उनके मुताबिक, छात्रा कारखानों में काम करने वाले लोगों को इकट्ठा करती थी और उन्हें आंदोलन के लिए उकसाती थी. बाद में यह गतिविधि नोएडा तक पहुंची.

उन्होंने दावा किया कि इस दौरान सड़कें जाम की गईं, कारखानों में आगजनी हुई और पथराव के मामले सामने आए. रोहतगी के मुताबिक, छात्रा को 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था.

NSA के तहत हिरासत में डीएम की भूमिका क्या है?

मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत का प्रस्ताव SHO स्तर से आगे बढ़ता है. इसके बाद कई स्तरों से प्रक्रिया आगे बढ़ती है और अंत में डीएम हिरासत का आदेश जारी करते हैं. इस आदेश को एक न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले सलाहकार प्राधिकरण से भी मंजूरी मिलनी होती है. इसके बाद राज्य और केंद्र सरकार इसकी पुष्टि करती हैं.

'हिरासत का आदेश एक महीने बाद जारी हुआ'

रोहतगी ने कहा कि छात्रा की गिरफ्तारी 12 अप्रैल को हुई थी, जबकि हिरासत का आदेश करीब एक महीने बाद जारी किया गया. उन्होंने हाईकोर्ट के निष्कर्ष को कानून की गलत व्याख्या बताया.

अब सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट का फैसला आने के बाद साफ होगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर क्या रुख रहता है, जिसमें डीएम मेधा रूपम के वेतन से 5 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर वसूलने का निर्देश दिया गया था.