उत्तर प्रदेश की सियासत में कभी-कभी चुनावी रैलियों से ज्यादा हलचल पार्टी दफ्तरों के भीतर होने वाली बंद कमरों की बैठकों से निकलकर बाहर आती है. ऐसा ही कुछ समाजवादी पार्टी की एटा और कासगंज जिले की समीक्षा बैठक में देखने को मिला. 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर लखनऊ में बुलाई गई इस बैठक में टिकट की दावेदारी और वर्चस्व को लेकर दो सपा नेता मंजीत यादव और जोगेंद्र सिंह यादव आपस में भिड़ गए. बात इतनी बढ़ गई कि खुद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव बुरी तरह नाराज हो गए और उन्होंने बैठक में ही मंजीत यादव को जमकर डांट लगा दी. इस वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अखिलेश यादव ने कड़ा एक्शन लेते हुए एटा और कासगंज की पूरी जिला इकाइयों और फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया.
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'पैसा देखिए... ये सब पैसे की गर्मी है'
बैठक के दौरान हुए हंगामे के बाद वायरल हुए वीडियो में अखिलेश यादव का गुस्सा साफ नजर आ रहा है. वे मंच से नाराजगी जताते हुए कहते सुने जा रहे हैं 'जब आदमी पार्टी का कहना नहीं मान रहा, व्यवहार खराब है तो हम किससे सर मारें? कोई बात नहीं, सब होता है... ये सब पैसे की गर्मी है, हां और क्या! पैसा देखिए... एक बात याद रखना, जिस पर ज्यादा पैसा हो जाएगा, वो आपको छोड़ के चला जाएगा, अपनी मर्जी से काम करेगा.'
अखिलेश यादव की इस तल्खी और डांट के बाद हॉल में सन्नाटा पसर गया. इस घटना के तुरंत बाद पार्टी नेतृत्व ने कड़ा संदेश देते हुए एटा और कासगंज संगठन पर गाज गिरा दी.
कौन हैं मंजीत यादव जिन्हें पड़ी अखिलेश की डांट?
बैठक में अखिलेश के गुस्से का शिकार बने मंजीत यादव एटा के रहने वाले हैं और लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं. मंजीत 2014 में सपा की 'साइइकिल यात्रा' के दौरान चर्चा में आए थे. इसके बाद 2016 में वे एटा जिला पंचायत के वार्ड नंबर 8 से सपा के टिकट पर जिला पंचायत सदस्य चुने गए. पार्टी हलकों में मंजीत यादव को सपा के शीर्ष 'यादव परिवार' का करीबी माना जाता है.
बताया जा रहा है कि मंजीत यादव आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में कासगंज सीट से सपा का टिकट चाहते हैं और इसी दावेदारी को लेकर बैठक में बहस छिड़ी थी.
एटा की राजनीति के बड़े खिलाड़ी जोगेंद्र सिंह यादव की सियासी हैसियत
दूसरी तरफ खड़े जोगेंद्र सिंह यादव का एटा की स्थानीय और प्रांतीय राजनीति में खासा प्रभाव और लंबा ट्रैक रिकॉर्ड रहा है. जोगेंद्र सिंह यादव 2006 और 2011 में एटा के जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं. वर्तमान में उनकी पत्नी रेखा यादव एटा की जिला पंचायत अध्यक्ष हैं. उनके बड़े भाई रामेश्वर सिंह यादव अलीगंज सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं.
जोगेंद्र सिंह यादव ने 2017 और 2022 में एटा सदर सीट से सपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा. 2022 के चुनाव में उन्हें 61,387 वोट मिले थे. हालांकि वे बीजेपी के विपिन कुमार डेविड से करीब 17,000 वोटों से चुनाव हार गए थे.
2022 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, जोगेंद्र यादव के पास करीब 23.72 करोड़ रुपये की संपत्ति है. उनके खिलाफ जमीन विवाद, मारपीट और गैंगस्टर एक्ट समेत कई आपराधिक मामले भी दर्ज रहे हैं. मार्च 2023 में गैंगस्टर एक्ट के तहत उनकी गिरफ्तारी हुई थी. करीब ढाई साल जेल में रहने के बाद 2025 में अलग-अलग मामलों में जमानत मिलने पर वे जेल से बाहर आए हैं.
2027 से पहले सपा के सामने अपनों को साधने की चुनौती
एटा और कासगंज की राजनीति में एक तरफ महत्वाकांक्षी मंजीत यादव हैं जो 2027 के लिए नए समीकरण साध रहे हैं तो दूसरी तरफ रसूखदार और पुराने खिलाड़ी जोगेंद्र सिंह यादव हैं. चुनाव में अभी समय है. लेकिन टिकट की होड़ और अंदरूनी गुटबाजी ने सपा के लिए सिरदर्द बढ़ा दिया है. जिला संगठन भंग होने के बाद अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव 2027 के महासमर से पहले एटा-कासगंज में बिखरे संगठन को कैसे एकजुट करते हैं.
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