कमांडो कोर्स कर 1998 में STF में आए सुनील कुमार, आखिरी एनकाउंटर में अरशद को मारा पर खुद की भी गई जान

शामली मुठभेड़ में STF इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने शहादत दी. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. जानें उनकी बहादुरी और एनकाउंटर की पूरी कहानी.

STF Inspector Sunil Kumar

उस्मान चौधरी

• 05:32 PM • 22 Jan 2025

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STF Inspector Sunil Kumar News: शामली की धरती पर एक बार फिर बहादुरी और बलिदान की कहानी लिखी गई है. STF के जांबाज इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी. गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में मौत से जंग लड़ते हुए उन्होंने आखिरी सांस ली. मालूम हो कि सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात शामली में एक लाख रुपये के इनामी अपराधी अरशद और उसके तीन साथियों को ढेर करने वाली STF टीम का इंस्पेक्टर सुनील हिस्सा थे. एनकाउंटर के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हुई. इंस्पेक्टर सुनील की कहानी से हर कोई प्रेरणा ले सकता है. आज आप इस खबर में आगे विस्तार से जानिए इंस्पेक्टर सुनील की पूरी कहानी.

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एनकाउंटर में गंभीर रूप से जख्मी हुए थे इंस्पेक्टर सुनील

मिली जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन में इंस्पेक्टर सुनील के गॉल ब्लेडर को हटाना पड़ा था. साथ ही डॉक्टरों ने उनकी बड़ी आंत का कुछ हिस्सा काटकर भी निकाला था. मुठभेड़ के दौरान एक गोली इंस्पेक्टर सुनील के लिवर को पार करके पीठ में अटक गई थी. पोस्टमॉर्टम के बाद इंस्पेक्टर सुनील कुमार के शव को उनके पैतृक गांव बना-मसूरी (मेरठ) ले जाया जाएगा.

ये है इंस्पेक्टर सुनील की पूरी कहानी

सुनील कुमार मूल रूप से मेरठ के इंचौली थाना क्षेत्र के मसूरी गांव के रहने वाले थे. उनके पिता का नाम चरण सिंह है. सुनील 1 सितंबर 1990 को यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे. एसटीएफ का गठन होने के बाद उन्होंने 1997 में मानेसर हरियाणा में कमांडो कोर्स किया था. फिर 1998 में सुनील कुमार STF से जुड़े और 2009 में मेरठ एसटीएफ में आए. 16 साल से वह एसटीएफ का हिस्सा थे. सुनील का 7 अगस्त 2002 को हेड कॉन्स्टेबल के पद पर प्रमोशन हुआ.

 

 

13 मार्च 2008 को जनपद फतेहपुर में हुई मुठभेड़ में ओमप्रकाश उर्फ उमर को मार गिराने में सुनील कुमार ने अपनी जान जोखिम में डाली थी और साहस और शौर्य के लिए उनको 16 सितंबर 2011 में आउट ऑफ ट्रेन प्रमोशन देकर हेड कॉन्स्टेबल से प्लाटून कमांडर पद पर प्रमोशन दिया गया था.

इसी के चलते 22 अप्रैल 2020 को दलनायक के पद पर प्रमोशन किया गया. एसटीएफ में उनका कई बड़ी घटनाओं में योगदान रहा और सोमवार रात वह एक लाख के इनामी अरशद सहित चार बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराने वाली टीम में रहे थे. 

सुनील कुमार के परिवार में कौन-कौन हैं?

Stf सूत्रों के अनुसार, सुनील कुमार 54 साल के थे. सुनील की पत्नी हाउस वाइफ हैं. इनके दो बच्चे हैं. एक बेटा एक बेटी. दोनों की शादी हो चुकी है. बताया जा रहा है कि बेटे की शादी 2 साल पहले ही हुई है. सुनील के एक बड़े भाई हैं. इनका परिवार किसान परिवार है और पिताजी भी खेती ही किया करते थे और बड़े भाई भी खेती करते हैं. पिता चरण सिंह का देहांत हो चुका है. लड़के का नाम मंजीत उर्फ मोनू बताया जा रहा है ,बेटी का नाम नेहा है , पत्नी हाउस वाइफ है