कागज में सैलरी कुछ और हाथ में बस 11000... नोएडा के आंदोलनकारी मजदूर चाहते क्या हैं?

Noida Labour News: नोएडा के सेक्टर-57 में वेतन वृद्धि और ग्रेड विवाद को लेकर श्रमिकों ने उग्र प्रदर्शन किया. मजदूरों का आरोप है कि उन्हें 28,000 रुपये के ग्रेड के बजाय कम वेतन दिया जा रहा है और ओवरटाइम का भुगतान भी आधा हो रहा है.

मोहित सिंह कुशवाहा

13 Apr 2026 (अपडेटेड: 13 Apr 2026, 07:12 PM)

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नोएडा के सेक्टर-57 में सोमवार को शांति भंग हो गई. यहां एक बड़ी कंपनी के कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि और कार्यस्थल पर हो रहे शोषण के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने न केवल कंपनी के बाहर नारेबाजी की, बल्कि मुख्य सड़क को भी जाम कर दिया जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं.

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28000 रुपये के ग्रेड पर छिड़ा विवाद

प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों का नेतृत्व कर रहे संतोष कुमार मिश्रा ने कंपनी के 'पे-स्लिप' दिखाते हुए गंभीर आरोप लगाए. उनका दावा है कि मजदूरों का कहना है कि पुराने ग्रेड के हिसाब से उन्हें 17000 रुपये मिलने चाहिए थे लेकिन केवल 13900 रुपये दिए जा रहे हैं. श्रमिकों के मुताबिक, वर्तमान में जो नया ग्रेड आया है उसके तहत वेतन 28000 रुपये होना चाहिए, लेकिन कंपनी इसे लागू नहीं कर रही है. आरोप है कि एचआर (HR) विभाग फर्जी पे-स्लिप बनाकर श्रमिकों को गुमराह कर रहा है.

15 घंटे काम और भगा देने की धमकी

प्रदर्शन में शामिल महिला और पुरुष श्रमिकों ने कंपनी के भीतर के माहौल को बेहद तनावपूर्ण बताया. मजदूरों का आरोप है कि उनसे 12 से 15 घंटे तक काम लिया जाता है. नियमों के मुताबिक ओवरटाइम का भुगतान 'डबल' होना चाहिए, लेकिन कंपनी केवल 'सिंगल' भुगतान कर रही है. जब श्रमिक अपने हक की बात करते हैं, तो उन्हें नौकरी से निकाल देने की धमकी दी जाती है. 5 साल से काम कर रहे पुराने कर्मचारियों ने बताया कि उनके वेतन में नाममात्र (100-200 रुपये) की ही बढ़ोतरी की गई है.

महंगाई के बीच 11000 में गुजारा नामुमकिन

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने अपनी आर्थिक बेबसी बयां करते हुए कहा कि 4000 रुपये तो कमरे का किराया है. महंगाई के इस दौर में 11000 रुपये की इन-हैंड सैलरी में परिवार पालना और खुद का खर्चा उठाना अब संभव नहीं रह गया है. मौके पर पहुंचे पुलिस प्रशासन ने सीमेंट के पोल लगाकर रास्ता बंद कर दिया और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की. हालांकि, मजदूरों की मांग है कि जब तक जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन लिखित में वेतन वृद्धि का आश्वासन नहीं देते, वे पीछे नहीं हटेंगे.