संभल में करीब 10 महीने पहले कब्रिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई सरकारी जमीन पर अब 1978 के दंगा पीड़ित परिवार को फिर से या जा रहा है . करीब 48 साल के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद इस पीड़ित परिवार को संभल में ही 100 वर्ग मीटर की जमीन का पट्टा आवंटित कर दिया गया है .
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साल 1978 के संभल दंगों के बाद यहां से पलायन कर चुके एक पीड़ित परिवार की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संभल प्रशासन से की गई गुहार रंग लाई है . प्रशासन ने इस परिवार को संभल में दोबारा बसाने का फैसला लेते हुए उस सरकारी भूमि पर पट्टा दिया है, जिसे 10 महीने पहले ही कब्रिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया था. इस खास मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री जेपीएस राठौर, मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर अंजनी कुमार सिंह, संभल के डीएम अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई की मौजूदगी रही. इस दौरान जमीन पर पूरे विधि-विधान और हवन-पूजन के साथ पीड़ित परिवार के नए आशियाने के लिए नींव रखी गई .
'इंदिरा गांधी घर आईं, वादा किया पर निभाया योगी जी ने'
1978 के उस दंगे के दौरान रामशरण दास रस्तोगी की बेहद निर्ममता से हत्या कर दी गई थी. आज पट्टा आवंटन के मौके पर मौजूद उनके पोते कपिल रस्तोगी ने यूपी Tak के कैमरे पर रोते और भावुक होते हुए अपना दर्द बयां किया.
कपिल रस्तोगी ने बताया, "29 मार्च 1978 को मेरे दादाजी की बेहद निर्दयी तरीके से हत्या कर दी गई थी. इसके बाद मेरे पिताजी ने मुकदमा संख्या 136/8 दर्ज कराया. उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री राम नरेश यादव जी, देश के प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई जी और नेता विपक्ष इंदिरा गांधी हुआ करती थीं. इंदिरा गांधी जी तो स्वयं हमारे घर पर आई थीं और उन्होंने परिवार को पूर्ण आश्वासन दिया था कि हमें एक आवास और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी के साथ सुरक्षा दी जाएगी. लेकिन, पूर्व की किसी भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की."
उन्होंने आगे कहा, "पिछली सरकारों ने कभी नहीं समझा कि मेरे पिताजी ने कितना संघर्ष किया. इस लंबी कानूनी लड़ाई को लड़ते-लड़ते मेरे पिताजी का भी स्वर्गवास हो गया. मेरे सिर पर न दादाजी का हाथ था, न पिताजी का. हमने कैसे जीवन काटा, कैसे रोटी खाई, यह हम ही जानते हैं. लेकिन जैसे ही यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के संज्ञान में आया, उन्होंने युद्ध स्तर पर कार्रवाई करवाई और आज हमारे परिवार को 100 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन किया है. इसके लिए मैं योगी जी और संभल प्रशासन का धन्यवाद करता हूं."
बुजुर्ग महिला रुकमन रस्तोगी के नाम आवंटित हुआ पट्टा
इस दंगा पीड़ित परिवार की बुजुर्ग महिला रुक्मन रस्तोगी के नाम से ही प्रशासन द्वारा यह पट्टा आवंटित किया गया है. पट्टा मिलने के बाद उन्होंने भी नम आंखों से सरकार का आभार जताया .
रुक्मन रस्तोगी ने कहा, "मैं रुक्मन रस्तोगी, स्वर्गीय रामशरण रस्तोगी की पुत्रवधू और स्वर्गीय सुवासन रस्तोगी की पत्नी हूं. मैं मुख्यमंत्री योगी जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहती हूं क्योंकि उन्होंने हमें फिर से संभल में बसने और अपना आशियाना बनाने की कृपा की है. इसके साथ ही संभल के शासन-प्रशासन और यहां पधारे सभी अतिथियों का भी मैं धन्यवाद करती हूं."
कार्यक्रम में उपस्थित एक स्थानीय शख्स ने कहा, "आज का दिन संभल के हिंदुओं के लिए गौरव का दिन है और संभल इसे कभी नहीं भूलेगा. संभल में पूर्व में कई बार दंगे हुए हैं और हमेशा बहुसंख्यक समाज को ही यहां से विस्थापित या पलायन होना पड़ा है. हिंदुओं को दोबारा स्थापित करने का जो प्रयास उत्तर प्रदेश शासन और संभल प्रशासन के माध्यम से किया जा रहा है, वह सराहनीय है. संभल भगवान कल्कि की नगरी और एक पवित्र तीर्थ नगरी है. आज एक परिवार को बसाया जा रहा है, हमारी मांग है कि आने वाले समय में जितने भी दंगा पीड़ित विस्थापित हुए हैं, उन सभी की पुनर्स्थापना संभल में की जानी चाहिए."
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