Varun Lohari Crime Story: बागपत में व्यापारी सोहनलाल और उनके बेटे को गोलियों से भूनकर हत्या करने वाला बदमाश वरूण लोहारी का नाम सुर्खियों में बना हुआ है. गैंगस्टर वरुण लोहारी ने पुलिस चौकी से महज 100 मीटर की दूरी पर दिनदहाड़े अंधाधुंध फायरिंग कर एक व्यापारी और उनके जवान बेटे की हत्या की थी. लेकिन ट्विस्ट यहीं खत्म नहीं होता. मर्डर करके भाग रहे इस अपराधी को गुस्साई भीड़ ने घेर लिया और पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया. खबर में जानिए वरुण लोहारी की पूरी क्राइम स्टोरी कि कैसे एक टीचर का बेटा इतना बड़ा गैंगस्टर बन गया.
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पिता को बचाने आया बेटा भी हुआ ढेर
बागपत के बड़ौत में बस स्टैंड के पास नेशनल हाईवे से सटा बाजार हमेशा की तरह गुलजार था. तभी अचानक दो हथियारबंद बदमाश वहां धमकते हैं और इलाके के बड़े कारोबारी सोहन लाल अग्रवाल की दुकान में घुसकर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा देते हैं. पिता को लहू-लुहान देख उनका बेटा विकास अग्रवाल उन्हें बचाने के लिए आगे दौड़ता है. लेकिन बेरहम कातिल विकास को भी गोलियों से भून देते हैं. बीच-बचाव करने आए एक राहगीर को भी गोली मार दी जाती है जिसकी हालत गंभीर बनी हुई है.
भाग रहे गैंगस्टर का भीड़ ने किया ऑन द स्पॉट इंसाफ
इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम देकर मुख्य आरोपी वरुण लोहारी जैसे ही अपने साथी के साथ भागने की कोशिश करता है. बाजार के व्यापारियों और आम जनता का सब्र टूट जाता है. सैकड़ों की भीड़ ने वरुण लोहारी को चारों तरफ से घेर लिया. भीड़ ने उसे इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी हड्डियां टूट गईं. इसी बीच भीड़ में से ही किसी ने वरुण को गोली भी मार दी. पुलिस जब तक उसे बचाकर अस्पताल ले जाती, तब तक इस खूंखार अपराधी ने दम तोड़ दिया.
11 साल पुरानी वो शराब पार्टी जिसने वरुण को बनाया कातिल
आखिर वरुण लोहारी ने सोहन लाल अग्रवाल के पूरे परिवार को क्यों खत्म करना चाहा? इसके पीछे 11 साल पुरानी एक रंजिश की कहानी है. वरुण बेहद सामान्य परिवार से आता था उसके पिता बाबूराम एक शिक्षक थे. 17 जुलाई 2015 को वरुण बड़ौत बाजार में दोस्तों के साथ शराब पार्टी कर रहा था. वह सोहन लाल अग्रवाल की एक दुकान पर गया और बिना पैसे दिए सामान उठाने लगा. सोहन लाल ने जब उसे टोका तो दोनों पक्षों के गुट आमने-सामने आ गए और वहां जमकर फायरिंग हुई. इस गोलीबारी में वरुण लोहारी के छोटे भाई कपिल की मौत हो गई थी जिसमें सोहन लाल अग्रवाल को नामजद आरोपी बनाया गया था. इसी केस की तारीख पर 9 जून को वरुण बड़ौत आया था. लेकिन उसके सिर पर खून सवार था और उसने कोर्ट के बाहर ही खूनी खेल खेल दिया.
हरिद्वार से चला रहा था रंगदारी का रैकेट
भाई की मौत के बाद वरुण लोहारी जरायम की दुनिया का बड़ा नाम बन गया. उसके खिलाफ हत्या, लूट, डकैती, और रंगदारी के करीब 19 संगीन मामले दर्ज थे. साल 2023 में योगी सरकार के निर्देश पर पुलिस ने उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए बड़ौत स्थित उसका मकान कुर्क कर दिया था. इसके बाद उसका परिवार उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार में रहने लगा था. साल 2019 में जब वह जेल में बंद था तब भी उसने पश्चिमी यूपी के एक बड़े व्यापारी से ₹15 लाख की रंगदारी मांगी थी जिससे वह इलाके के व्यापारियों के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुका था.
3 महीने की प्रेग्नेंट पत्नी का क्या कसूर?
इस खौफनाक वारदात ने हंसते-खेलते अग्रवाल परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया है. सोहन लाल के छोटे भाई ने रोते हुए पुलिस व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने बताया कि 'हमने चार दिन पहले ही चौकी इंचार्ज महिपाल दरोगा जी को आगाह किया था कि वरुण हिस्ट्रीशीटर है और वह तारीख पर आ रहा है, हमें सुरक्षा दी जाए. लेकिन पुलिस सोई रही. हमारी दुकान से तहसील 50 मीटर और पुलिस चौकी सिर्फ 100 मीटर दूर है फिर भी बदमाश मर्डर कर चले गए. विकास (मृतक बेटे) की शादी अभी पिछले साल 4 दिसंबर 2025 को हुई थी. उसकी पत्नी 3 महीने की प्रेग्नेंट है उसका क्या कसूर था कि उसका सुहाग उजाड़ दिया?'
कातिल गैंगस्टर का रिटायर्ड शिक्षक पिता गिरफ्तार
इस हाई-प्रोफाइल मामले में बागपत पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है. पुलिस के मुताबिक, सोहन लाल अग्रवाल के परिजनों की तहरीर पर 5 नामजद और 1 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. इस साजिश में मुख्य आरोपी वरुण लोहारी के पिता बाबूराम (जो रिटायर्ड टीचर हैं) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
मामले की जानकारी देते हुए बड़ौत पुलिस प्रशासन ने बताया कि फरार आरोपी सचिन उर्फ मोंटो और जयंत गोलू की गिरफ्तारी के लिए कुल 10 पुलिस टीमों का गठन किया गया है. चूंकि मुख्य शूटर वरुण लोहारी की भी भीड़ के हमले में मौत हो चुकी है. इसलिए इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय बनने की चाह रखने वाले एक हिस्ट्रीशीटर का अंत भी उतना ही खौफनाक रहा जितना उसका जुर्म था.
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