CBSE पोर्टल पर किया ये काम और सीधे IIT कानपुर में लग गई नौकरी, कौन है 12वीं का छात्र निसर्ग अधिकारी?

सीबीएसई के मार्क्स सबमिशन पोर्टल में सुरक्षा खामियां उजागर करने वाले 12वीं पास छात्र निसर्ग अधिकारी को आईआईटी कानपुर ने अपने C3iHub में OSINT और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के पद पर नियुक्त किया है.

UP Tak

सिमर चावला

11 Jun 2026 (अपडेटेड: 11 Jun 2026, 01:18 PM)

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IIT Kanpur hires Nisarga: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के 'मार्क्स सबमिशन पोर्टल' में सुरक्षा कमियां या लूपहोल्स ढूंढकर देश भर में सुर्खियां बटोरने वाले छात्र निसर्ग अधिकारी को आईआईटी (IIT) कानपुर ने अपने यहां नौकरी पर रखा है.

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हाल ही में अपनी 12वीं की परीक्षा पास करने वाले निसर्ग को आईआईटी कानपुर के टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब यानी C3iHub में 'ओएसआईएनटी (OSINT) और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर' के पद पर नियुक्त किया गया है. निसर्ग इस संस्थान में भर्ती होने वाले सबसे युवा इंजीनियर्स में से एक हैं.

क्या काम करेंगे निसर्ग?

  • निसर्ग को कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर साइबर सिक्योरिटी टीम में शामिल किया गया है. 
  • अपने इस नए रोल में वे इंटरनेट पर मौजूद पब्लिक इंफॉर्मेशन और डेटा का विश्लेषण करेंगे.
  • अलग-अलग वेबसाइट्स और ऐप्स में सुरक्षा की कमियां ढूंढेंगे.
  • सरकारी और निजी संस्थानों को साइबर खतरों और हैकिंग से बचाने में मदद करेंगे.

ऐसे आए थे चर्चा में, पोर्टल पर चला दिया था एनीमेशन

निसर्ग ने कुछ समय पहले सीबीएसई (CBSE) के उस पोर्टल में बड़ी सुरक्षा कमियां उजागर की थीं, जिसके जरिए स्कूल बच्चों के नंबर अपलोड करते हैं. एक सच्चे एथिकल हैकर की तरह उन्होंने इस कमजोरी का कोई गलत फायदा नहीं उठाया, बल्कि इसकी जानकारी जिम्मेदारी के साथ सीधे बोर्ड को दी.

हाल ही में निसर्ग तब दोबारा चर्चा में आए, जब उन्होंने सीबीएसई पोर्टल की कमजोरी दिखाते हुए उस पर मशहूर "बैड एप्पल" एनीमेशन चलाकर दिखा दिया था. इसके बाद से ही सरकारी वेबसाइट्स की सुरक्षा को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई थी.

निसर्ग अधिकारी नाम के एक युवा को हमारे C3iHub में नियुक्त किया गया है. वैसे तो आईआईटी कानपुर ने साइबर सिक्योरिटी के कामों के लिए पहले भी युवाओं को मौका दिया है, लेकिन निसर्ग निश्चित रूप से हमारी टीम में शामिल होने वाले सबसे युवा इंजीनियर्स में से एक हैं.

- प्रोफेसर मनिंदर अग्रवाल, आईआईटी कानपुर

डिग्री से ज्यादा टैलेंट को तरजीह

आईआईटी कानपुर का ये फैसला दिखाता है कि आज के दौर में साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में सिर्फ बड़ी-बड़ी डिग्रियां ही काफी नहीं हैं, बल्कि असली हुनर और प्रैक्टिकल नॉलेज की ज्यादा वैल्यू है. निसर्ग की ये कामयाबी देश के उन तमाम युवाओं और छात्रों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो कोडिंग और एथिकल हैकिंग में दिलचस्पी रखते हैं. ये कहानी सिखाती है कि अगर सही और कानूनी दायरे में रहकर अपनी प्रतिभा दिखाई जाए, तो बड़ी से बड़ी कामयाबी कम उम्र में भी मिल सकती है.

क्यों खास है 'थ्रेट इंटेलिजेंस' का काम?

आज के दौर में जैसे-जैसे सरकारी काम, स्कूल-कॉलेज और बिजनेस डिजिटल हो रहे हैं, वैसे-वैसे डेटा चोरी और हैकिंग का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. ऐसे में थ्रेट इंटेलिजेंस एक्सपर्ट्स साइबर टीम की 'आंख और कान' की तरह काम करते हैं. वे होने वाले साइबर हमलों का पहले ही अंदाजा लगा लेते हैं और सुरक्षा मजबूत करके हैकर्स के मंसूबों को नाकाम कर देते हैं.