69 हजार शिक्षक भर्ती केस में बड़ा मोड़, सुप्रीम कोर्ट में योगी सरकार ने रखा नया फॉर्मूला

कुमार अभिषेक

• 10:33 AM • 28 Jul 2026

यूपी Tak का खास शो 'आज का UP' राज्य की बड़ी खबरों का विश्लेषण करता है. आज के एपिसोड में तीन अहम मुद्दों पर चर्चा की गई. पहली खबर 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में योगी सरकार के नए हलफनामे से जुड़ी है, जिससे लंबे समय से चल रहे विवाद के खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है.

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69000 Teacher Recruitment News: यूपी Tak का खास शो 'आज का UP' राज्य की बड़ी खबरों का विश्लेषण करता है. आज के एपिसोड में तीन अहम मुद्दों पर चर्चा की गई. पहली खबर 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में योगी सरकार के नए हलफनामे से जुड़ी है, जिससे लंबे समय से चल रहे विवाद के खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है. दूसरी खबर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी और अखिलेश यादव के बीच गठबंधन को लेकर चल रही सियासी बयानबाजी पर आधारित है. वहीं तीसरी खबर संसद में डिंपल यादव के उस बयान की है, जिसमें उन्होंने छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई पर गृह मंत्री से जवाब मांगा.

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69 हजार शिक्षक भर्ती: सुप्रीम कोर्ट में योगी सरकार का नया हलफनामा

69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल किया है. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना है और माना जा रहा है कि जल्द फैसला सुनाया जा सकता है. सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि 67,867 शिक्षक जो वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं, उनकी नौकरी सुरक्षित रहेगी. किसी भी कार्यरत शिक्षक की सेवा पर कोई असर नहीं पड़ेगा. सरकार ने अदालत को 8,270 अभ्यर्थियों की संशोधित सूची भी सौंपी है. इस सूची में 3,324 अभ्यर्थी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से हैं. साथ ही सरकार ने बताया कि पिछली सूची में लगभग 4,926 ऐसे अभ्यर्थी थे जिन्होंने मेरिट सूची में आने के बावजूद जॉइनिंग नहीं की थी.

अब इन रिक्त पदों के साथ संशोधित सूची के अभ्यर्थियों के समायोजन की प्रक्रिया पर भी सरकार ने अपना पक्ष रखा है. लंबे समय से ओबीसी अभ्यर्थी मेरिट डाउन कर समायोजन की मांग कर रहे थे. माना जा रहा है कि सरकार के इस हलफनामे के बाद विवाद सुलझने की दिशा में आगे बढ़ सकता है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले पर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो जाएगी.

ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव पर क्या बोले अखिलेश यादव?

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की बात कर रहे हैं.

हाल ही में ओवैसी ने कहा कि अगर सामने कुर्सी पर अखिलेश यादव बैठेंगे तो वह भी बराबरी से बैठकर अपने हक और इंसाफ की बात करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह गठबंधन के लिए तैयार हैं और बाद में पछताना नहीं चाहिए.

इस पूरे मामले पर जब संसद परिसर में अखिलेश यादव से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि "किसी से उलझने की जरूरत नहीं है. हम अपने रास्ते पर चलेंगे. पीडीए, सामाजिक न्याय और संविधान के तहत हक और सम्मान दिलाने की लड़ाई जारी रहेगी. अभी जिस गठबंधन के साथ भाजपा को हराया है, उसी गठबंधन के साथ आगे भी चलेंगे." इस बयान को ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव को लेकर समाजवादी पार्टी का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है.

इसी मुद्दे पर सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी कभी यह स्वीकार नहीं करेगी कि मुसलमानों के नेता ओवैसी हैं. उन्होंने कहा कि यही वजह है कि दोनों दलों के बीच गठबंधन की संभावना नहीं दिखती.

वहीं ओवैसी ने जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव को घेरा और कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब यूनिवर्सिटी का नियमितीकरण क्यों नहीं कराया गया.

संसद में डिंपल यादव का सरकार पर हमला

छात्रों के आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने संसद में सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि छात्रों पर जिस तरह कार्रवाई हुई, लाठियां चलाई गईं और हिंसा हुई, उस पूरे मामले पर पहले गृह मंत्री को सदन में जवाब देना चाहिए. उनका कहना था कि जब तक गृह मंत्री सदन में आकर पूरी घटना पर जवाब नहीं देंगे, तब तक विपक्ष सदन चलने नहीं देगा.

डिंपल यादव ने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान जो कुछ हुआ, उसके लिए जिम्मेदार कौन है, इसका जवाब सरकार को देना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की मांग है कि पहले सरकार इस मुद्दे पर जवाब दे, उसके बाद ही अन्य विषयों पर चर्चा हो.