श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मामला लगातार बढ़ता चला जा रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन अधिकारियों की एसआईटी की टीम अपनी जांच शुरू कर दी है. इस पूरे मामले की जांच के बीच कई किरदारों का जिक्र हो रहा है, जिसमें राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है. कहा जा रहा है कि टिन्नू यादव ट्रस्ट में काफी पावरफुल था और राम मंदिर के सिक्योरिटी मैनेजमेंट से लेकर चढ़ावे को बैंक तक पहुंचाने की तमाम जिम्मेदारियां वही संभालता था. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर टिन्नू यादव कौन है और कैसे एक टेंपो चालक से वह इतना पावरफुल बना और चंपत राय के साथ उसका क्या कनेक्शन है?
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पिता बेचते थे चाय, खुद चलाता था टेंपो, ऐसा रहा शुरुआती सफर
टिन्नू यादव को लोग वहां आम बोलचाल में इसी नाम से पुकारते हैं, लेकिन उसका असली नाम राम शंकर यादव है. राम शंकर यादव के पारिवारिक बैकग्राउंड की बात करें तो वह एक बेहद साधारण परिवार से आता है. उसके पिता का नाम तुलसीराम यादव था, जो अयोध्या में नया घाट के पास एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे. टिन्नू यादव का पुश्तैनी घर आज भी राम मंदिर से महज 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्वर्ग द्वार तुलसी पार्क के पीछे के मोहल्ले में स्थित है. यह घर बहुत छोटा है, जिसकी चौड़ाई मात्र 7 फीट है और यह तीन मंजिल का बना हुआ है. राम शंकर यादव खुद कभी टेंपो चलाया करता था.
90 के दशक में आंदोलन और वीएचपी से जुड़ाव
राम शंकर यादव के रसूखदार बनने के सफर की शुरुआत 90 के दशक में हुई, जब राम मंदिर आंदोलन की धूम थी. इसी दौरान वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के मंत्री महेश नारायण के संपर्क में आया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महेश नारायण ने उसे अपने यहां काम पर रख लिया और अपनी गाड़ी चलाने के लिए दे दी. इस तरह कारसेवकपुरम में उनका आना-जाना शुरू हुआ और वह विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेताओं के संपर्क में रहने लगे.
यह वही दौर था जब चंपत राय को 1991 में क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेजा गया था. महेश नारायण के निधन के बाद, राम शंकर यादव चंपत राय के बेहद करीबी हो गया. उसे कारसेवकपुरम में गाड़ियां चलाने और वहां चल रही कई गाड़ियों की जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला.
राम मंदिर ट्रस्ट में एंट्री और पावरफुल दखल
जब राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन हुआ, तब राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की एंट्री एक एंप्लॉय के तौर पर हुई. चंपत राय का घनिष्ठ होने के कारण उसे बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गईं. वह मंदिर परिसर के मैन पावर मैनेजमेंट के प्रमुख बनया गया. सुरक्षा व्यवस्था के मैनेजमेंट से लेकर मंदिर में आने वाले चढ़ावे को बैंक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी टिन्नू यादव ही संभालता था.
1 करोड़ का रोजाना चढ़ावा और पूर्व लेखा प्रभारी का दावा
आरोपों के मुताबिक, मंदिर परिसर में करीब 14 दान पेटियां रखी गई हैं, जिनमें हर दिन करीब 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का चढ़ावा आता था. इसके अलावा भक्त सोने, चांदी और हीरे के जेवरात भी दान पेटी में डालते थे. इस चढ़ावे को एक बंद कमरे में गिना जाता था, जिसकी निगरानी सीसीटीवी के जरिए होती थी. इस प्रक्रिया में ट्रस्ट के छह पदाधिकारी और बैंक के लोगों समेत कुल नौ लोग शामिल रहते थे.
टिन्नू यादव का नाम इस विवाद में तब चर्चा में आया, जब पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का एक सोशल मीडिया इंटरव्यू वायरल हुआ. महिपाल सिंह ने दावा किया कि पैसे की काउंटिंग के वक्त टिन्नू यादव वहां मौजूद रहता था. महिपाल सिंह ने यहीं पर हेराफेरी के आरोप लगाए हैं.
करोड़ों की संपत्ति और आलीशान बंगले के आरोपों की ग्राउंड रियलिटी
विवादों के बीच यह चर्चा भी तेज हुई कि टिन्नू यादव ने कुछ ही सालों में करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली है और वह 25-30 कमरों के आलीशान बंगले का मालिक है. इसकी हकीकत जानने के लिए जब ग्राउंड पर पड़ताल की गई, तो वहां की सच्चाई कुछ अलग सामने आई.
टिन्नू यादव के उस मकान में रहने वाले किराएदार छात्रों ने बताया कि वहां सोशल मीडिया पर चल रहे दावों (20-25 करोड़ का मकान और 60-70 कमरे) जैसा कुछ नहीं है, बल्कि वहां केवल 8-10 कमरे हैं. अंबेडकर नगर के रहने वाले एक छात्र ने बताया, "मकान मालिक हमारे बहुत अच्छे आदमी हैं. अगर हमारा रेंट (किराया) दो-तीन महीने लेट भी हो जाता है, तो भी वह कुछ नहीं बोलते और हमारी बहुत हेल्प करते हैं." किराएदारों ने अरबों की प्रॉपर्टी के आरोपों को गलत और एक साजिश बताया.
वहीं पड़ोसियों ने भी टिन्नू यादव के व्यवहार की तारीफ करते हुए कहा कि उनका सारा परिवार बहुत बढ़िया है. एक पड़ोसी ने बताया, "यह सब बातें गलत लगाई जा रही हैं. वह व्यवहार में सबसे बढ़िया हैं. कहीं प्रसाद भी मिलता है, तो पूरे मोहल्ले में बांटते हैं. वह सच्चे आदमी हैं, इसीलिए भगवान उनकी परीक्षा ले रहे हैं."
अखिलेश यादव के पोस्ट से शुरू हुआ मामला, SIT जांच जारी
इस पूरे मामले की शुरुआत 7 जून को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हुई, जिसमें उन्होंने राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी होने का आरोप लगाया था. विपक्ष के लामबंद होने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने खुद सामने आकर सफाई दी थी कि किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हुई है.
चूंकि यह मामला लोगों की भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए सरकार ने इसकी निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया. इस टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त, लखनऊ रेंज के आईजी और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव शामिल हैं, जो मामले की जांच कर रहे हैं. फिलहाल इस मामले में पुलिस का कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया है और न ही कोई एफआईआर दर्ज हुई है.
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