यूपी के किसान ऑनलाइन फसल की बोली लगाकर कमा रहे खूब मुनाफा, 'ई-नाम' के जरिए पारदर्शी तरीके से तय हो रहा दाम

यूपी तक

• 12:11 PM • 08 Aug 2026

UP Farmers on e-NAM: उत्तर प्रदेश के किसानों को अब अपनी फसल का सही दाम पाने के लिए सिर्फ स्थानीय मंडियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है. केंद्र सरकार का एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म 'ई-नाम' (e-NAM) पोर्टल के जरिए यूपी की मंडियां अब तेजी से हाई-टेक हो रही हैं.

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UP Farmers On e-NAM: उत्तर प्रदेश के किसानों को अब अपनी फसल का सही दाम पाने के लिए सिर्फ स्थानीय मंडियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है. केंद्र सरकार का एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म 'ई-नाम' (e-NAM) पोर्टल के जरिए यूपी की मंडियां अब तेजी से हाई-टेक हो रही हैं. इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसान घर बैठे पूरे देश के खरीदारों को अपनी फसल ऑनलाइन बेच रहे हैं. किसानों को और बेहतर सुविधाएं देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडियों के आधुनिकीकरण और उन्हें ई-नाम से जोड़ने के लिए एक बड़े बजट को भी मंजूरी दी है.

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क्या है ई-नाम (e-NAM) योजना?

ई-नाम (इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) केंद्र सरकार का एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जिसकी शुरुआत 14 अप्रैल 2016 को की गई थी. यह प्लेटफॉर्म देश भर की कृषि मंडियों (APMC) को आपस में डिजिटल रूप से जोड़ता है. इसकी मदद से किसान अपनी फसल को सिर्फ नजदीकी मंडियों तक सीमित रखने के बजाय, ऑनलाइन नीलामी के जरिए पूरे देश में कहीं भी बेच सकते हैं. इससे किसानों को फसल का सही दाम मिलता है और बीच में दलालों या बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है.

देशभर में ई-नाम की मौजूदा स्थिति

सरकारी डाटा के मुताबिक जून 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 1,522 मंडियां इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुकी हैं. इस प्लेटफॉर्म पर देशभर के 1.79 करोड़ से ज्यादा किसान और 2.67 लाख से अधिक व्यापारी रजिस्टर्ड हैं. अब तक ई-नाम के जरिए 4,39,941 करोड़ रुपये का कृषि व्यापार किया जा चुका है. किसान इस प्लेटफॉर्म पर 231 तरह के कृषि उत्पादों की आसानी से ऑनलाइन नीलामी कर सकते हैं.

ई-नाम से जुड़े यूपी के किसान

ई-नाम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के मामले में उत्तर प्रदेश पूरे देश में सबसे आगे है. अगस्त 2025 तक यूपी के 33.05 लाख किसान इस प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड हो चुके हैं. राज्य की मंडियों में ऑनलाइन कारोबार भी लगातार बढ़ रहा है. साल 2022-23 में जहां 7.49 लाख मीट्रिक टन का व्यापार हुआ था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 8.97 लाख मीट्रिक टन और 2024-25 में 10.89 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है.

मंडियों के विकास को बड़ा बजट

31 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की 172वीं बोर्ड बैठक हुई. इस अहम बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3,025.49 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की ज्यादा से ज्यादा मंडियों को ई-नाम प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए. इसके साथ ही इस बैठक में मंडियों में पीने के पानी, साफ-सफाई और रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर खास जोर दिया गया है.

किसानों को मिलेंगे कई बड़े फायदे

उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले से किसानों को राज्य और देश भर के ज्यादा खरीदारों तक पहुंचने का मौका मिलेगा और ऑनलाइन नीलामी से दाम तय होने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी. मंडी परिसरों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत कृषि प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) इकाइयां लगाई जाएंगी, जिससे उपज की वैल्यू बढ़ेगी और किसानों को ज्यादा मुनाफा होगा.

दलहन और तिलहन की खरीद को मजबूत करने के लिए सहकारी संस्थाओं को बिना ब्याज के पैसा दिया जाएगा. इसके अलावा हर जिले में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को जोड़ने और उनके ऑर्गेनिक उत्पादों के सर्टिफिकेशन की भी व्यवस्था की जाएगी.

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