क्या राज ठाकरे ने यूपी वालों को 'लात मारने' की बात कही? वायरल वीडियो की ये है असल कहानी

रविवार को हुई एक संयुक्त रैली में राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और शरद पवार की एनसीपी एक साथ नजर आए. इसी रैली के दौरान राज ठाकरे का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह कह रहे हैं कि उत्तर भारतीयों को मैं लात से मारूंगा.

Raj Thackeray

रजत सिंह

12 Jan 2026 (अपडेटेड: 12 Jan 2026, 03:24 PM)

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Raj Thackeray Viral Video: मुंबई महानगरपालिका चुनाव के लिए ठाकरे परिवार का एकजुट होना महाराष्ट्र की सियासत की सबसे बड़ी खबर है. रविवार को हुई एक संयुक्त रैली में राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और शरद पवार की एनसीपी एक साथ नजर आए. इसी रैली के दौरान राज ठाकरे का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह कह रहे हैं कि उत्तर भारतीयों को मैं लात से मारूंगा. लेकिन इस वायरल वीडियो के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है आइए जानते हैं.

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वायरल वीडियो के पीछे की कहानी

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि राज ठाकरे ने उत्तर भारतीयों को लात मारने की बात कही है. लेकिन असल में उनका बयान हिंदी भाषा को थोपने के विरोध में था. दरअसल राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और शिवसेना ने रविवार को एक संयुक्त रैली की. यह रैली बीएएमसी यानी मुंबई महानगर पालिका के चुनाव को लेकर की गई. 15 जनवरी को चुनाव है और 16 जनवरी को रिजल्ट आना है. इसी चुनाव में लंबे समय के बाद ठाकरे परिवार एकजुट हुआ है. इस दौरान राज ठाकरे मराठी मानुष को संबोधित करते हुए मराठी अस्मिता की बात कर रहे थे.

यहां देखें पूरी वीडियो रिपोर्ट

राज ठाकरे ने रैली में कहा कि 'यूपी और बिहार के लोगों को समझना चाहिए कि हिंदी आपकी भाषा नहीं है. आपकी भाषा भोजपुरी और मैथिली है. मुझे किसी भाषा से नफरत नहीं है. लेकिन अगर आप हिंदी को हमारे ऊपर थोपने की कोशिश करेंगे तो मैं लात मारूंगा.' उन्होंने आगे मराठी मानुष को आगाह करते हुए कहा कि बाहर से आने वाले लोग आपका हिस्सा छीन रहे हैं और अगर आज मराठी व्यक्ति एकजुट नहीं हुआ तो यह उसका आखिरी चुनाव साबित होगा.

BMC चुनाव में एकजुट हुए राज ठाकरे और उद्धव

महानगर पालिका (BMC) पर दशकों से अविभाजित शिवसेना का कब्जा रहा है. पिछले चुनाव के आंकड़ों को देखें तो शिवसेना के पास 84 सीटें थीं और अगर इसमें मनसे की सीटों को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 99 तक पहुंच जाता था. लेकिन शिवसेना में हुई ऐतिहासिक फूट ने पूरे समीकरण बदल दिए. एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे को सत्ता गंवानी पड़ी और शिंदे ने बीजेपी व अजीत पवार के साथ मिलकर सरकार बना ली. विधानसभा चुनाव में भी उद्धव ठाकरे का महाविकास अघाड़ी गठबंधन (कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी) बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन के सामने टिक नहीं सका.

सत्ता हाथ से जाने और पार्टी का नाम-निशान (तीर-कमान) शिंदे गुट के पास चले जाने के बाद ठाकरे परिवार के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया. इसी संकट ने भाई-भाई को साथ आने पर मजबूर कर दिया. सालों बाद राज ठाकरे अपने पैतृक घर मातोश्री पहुंचे और उद्धव ठाकरे से हाथ मिलाया. अब बीएमसी की 227 सीटों के लिए एक नया मोर्चा तैयार है जिसमें उद्धव गुट, मनसे और शरद पवार की एनसीपी एक साथ चुनावी मैदान में हैं.

इस बार बीएमसी चुनाव मुख्य रूप से दो ध्रुवों के बीच सिमट गया है. एक ओर ठाकरे- पवार गठबंधन है. इसमें शिवसेना (उद्धव गुट), मनसे और शरद पवार की एनसीपी शामिल है जो मराठी मानुषके मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं. दूसरी ओर महायुति गठबंधन है. इसमें एकनाथ शिंदे की असली शिवसेना (तीर-कमान के साथ) और बीजेपी एक साथ मिलकर हुंकार भर रहे हैं. इसके अलावा कांग्रेस और अजीत पवार की एनसीपी अलग-अलग चुनाव लड़कर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में हैं.

जीत-हार की चाबी राज ठाकरे का ताजा विवादित बयान इस गठबंधन के लिए मुसीबत बन सकता है. मुंबई के कई वार्डों में उत्तर भारतीय मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं. अगर राज ठाकरे के हिंदी विरोध वाले बयान से उत्तर भारतीय नाराज होकर एकतरफा मतदान करते हैं तो इसका सीधा नुकसान उद्धव ठाकरे को उठाना पड़ सकता है. सवाल अब भी वही है कि क्या मराठी मानुष की राजनीति करने वाला ठाकरे परिवार बीएमसी में अपनी बादशाहत बचा पाएगा, या फिर यह किला भी उनके हाथ से निकल जाएगा?

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