'यमराज भी आ जाएं तो...' यूपी के IAS-IPS अफसरों को लेकर सीएम योगी का नया बयान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने दावा किया कि पहले आईएएस अधिकारी आईपीएस अधिकारियों की फाइलें दबा देते थे, लेकिन अब कमिश्नरेट व्यवस्था में पुलिस को ज्यादा अधिकार मिले हैं.

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17 Jun 2026 (अपडेटेड: 17 Jun 2026, 05:59 PM)

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने बुधवार को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस सुधारों पर खुलकर बात की. सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने से समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं. इससे पहले राज्य में आईएएस अफसर, आईपीएस अफसरों को दबाकर रखते थे.

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ये बातें मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा चुने गए 930 कंप्यूटर ऑपरेटरों (ग्रेड-ए) को नियुक्ति पत्र बांटने के दौरान कहीं.

IAS बनाम IPS पर क्या बोले मुख्यमंत्री?

मुख्यमंत्री ने पुराने सिस्टम पर तंज कसते हुए कहा, "पहले उत्तर प्रदेश में आईएएस अफसर, आईपीएस अफसरों को दबाकर रखते थे और उनकी फाइलें दबा देते थे. एक बार अगर आईएएस अधिकारी ने फाइल बंद कर दी, तो उसे दोबारा खुलवाना नामुमकिन जैसा था. स्थिति यह थी कि अगर यमराज भी आ जाएं, तो वे भी आईएएस अफसर से फाइल नहीं खुलवा सकते थे."

सीएम ने बताया कि पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव 1972 से अटका हुआ था, लेकिन पिछली सरकारों ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया. अब यूपी के 7 बड़े जिलों (लखनऊ, गौतम बुद्ध नगर, वाराणसी, प्रयागराज, गाजियाबाद, कानपुर और आगरा) में ये सिस्टम कामयाबी से चल रहा है. इस सिस्टम में आईपीएस अधिकारी के पास सीधे बड़े फैसले लेने के अधिकार होते हैं.

यूपी पुलिस में 2.15 लाख भर्तियां

  • पारदर्शी सरकारी नौकरियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कानून का राज स्थापित करने के लिए बिना किसी भेदभाव के भर्तियां जरूरी हैं.
  • पिछले 9 वर्षों में यूपी पुलिस में अलग-अलग पदों पर करीब 2.15 लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है. सभी भर्तियां पूरी तरह ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ हुई हैं, इसमें किसी की सिफारिश या भेदभाव नहीं चला.
  • हाल ही में लगभग 35,000 पुलिस कांस्टेबल पदों के लिए परीक्षा हुई, जिसमें करीब 28 लाख युवाओं ने आवेदन किया. इसके अलावा 41,000 होमगार्ड पदों के लिए भी परीक्षाएं कराई गईं.

डिजिटल वॉरियर्स बनेंगे नए कंप्यूटर ऑपरेटर

नियुक्ति पत्र पाने वाले 930 कंप्यूटर ऑपरेटरों को बधाई देते हुए सीएम योगी ने कहा कि वे पुलिस विभाग में डिजिटल वॉरियर्स की तरह भूमिका निभाएंगे. डिजिटल युग में आ रही नई चुनौतियों और ऑनलाइन अपराधों से निपटने में उनकी भूमिका सबसे अहम होगी.

फॉरेंसिक और साइबर क्राइम से निपटने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर

मुख्यमंत्री ने बताया कि डिजिटल और आधुनिक अपराधों को रोकने के लिए यूपी पुलिस को हाईटेक किया गया है... 

  • फॉरेंसिक लैब: पहले उत्तर प्रदेश में सिर्फ 4 फॉरेंसिक लैब थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 12 हो चुकी है. राज्य का अपना फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट भी है. साथ ही बड़े जिलों में 3 और छोटे जिलों में 2 मोबाइल फॉरेंसिक वैन दी गई हैं.
  • साइबर थाने: पहले पूरे यूपी में सिर्फ एक साइबर थाना हुआ करता था, लेकिन आज हर जिले में एक साइबर थाना है और हर स्थानीय थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई है.

'10 साल पहले सुरक्षित नहीं थे अफसर'

पुरानी कानून-व्यवस्था की याद दिलाते हुए सीएम योगी ने मुरादाबाद की एक पुरानी घटना का जिक्र किया, जहां हिंसा के दौरान एक डीआईजी स्तर के आईपीएस अफसर पर भीड़ ने हमला कर दिया था. सीएम ने कहा, "जब उस समय एक आईपीएस अधिकारी ही सुरक्षित नहीं था, तो आम जनता और महिलाओं की स्थिति क्या रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है."

यूपी की आर्थिक तरक्की का दावा

मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि साल 2017 से पहले राज्य में करीब 14,000 फैक्ट्रियां थीं, जो अब बढ़कर 32,000 से ज्यादा हो गई हैं. इससे राज्य में रोजगार के नए मौके बने हैं और 2017 के मुकाबले प्रदेश के लोगों की प्रति व्यक्ति आय भी तीन गुना बढ़ गई है.