पूर्वांचल के गांवों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. यहां की ग्रामीण महिलाएं अब पारंपरिक तरीकों को छोड़ डिजिटल तौर-तरीकों से डेयरी कारोबार चला रही हैं.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुरू हुई इस पहल के बाद करीब 50 हजार महिलाएं मोबाइल ऐप के जरिए दूध के कलेक्शन, उसकी क्वालिटी की जांच, सेल और पैसों के लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड खुद संभाल रही हैं.
इस डिजिटल मॉडल ने न केवल डेयरी बिजनेस से बिचौलियों का खेल खत्म किया है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बना दिया है.
7 जिलों में रोज 2 लाख लीटर दूध का कारोबार
वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, गाजीपुर, सोनभद्र, बलिया और भदोही जिलों की महिलाएं इस मुहिम से जुड़कर हर दिन औसतन दो लाख लीटर से अधिक दूध का कारोबार कर रही हैं.
'काशी दुग्ध उत्पादक संस्था' के इस डिजिटल नेटवर्क की वजह से अब पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो गई है. गांवों में बने कलेक्शन सेंटर्स पर दूध की मात्रा और फैट की जांच डिजिटल मशीनों से होती है और इसकी हर जानकारी 'काशी ई-डेयरी' ऐप पर तुरंत अपडेट हो जाती है.
सीधे बैंक खाते में आता है पैसा, बिचौलियों की छुट्टी
इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी है कि पशुपालकों को अपने पैसे के लिए भटकना नहीं पड़ता. हर 10 दिन में दूध की पेमेंट सीधे किसानों और पशुपालकों के बैंक खाते में भेज दी जाती है. महिलाओं को मोबाइल ऐप पर दूध की बिक्री, फैट का प्रतिशत और पेमेंट का पूरा ब्यौरा लाइव दिखता रहता है.
12 हजार महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी'
डिजिटल तकनीक को अपनाने का असर अब महिलाओं की कमाई पर भी दिखने लगा है. संस्था से जुड़ी करीब 12 हजार महिलाएं अब 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं. बैंक खातों में आ रही नियमित इनकम की वजह से गांवों में महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. जो महिलाएं पहले सिर्फ पशुपालन तक सीमित थीं, वे अब तकनीक के सहारे बिजनेस संभाल रही हैं.
क्या है डिजिटल डेयरी नेटवर्क?
गांवों के दुग्ध संग्रह केंद्रों को मोबाइल ऐप और डिजिटल मशीनों से जोड़ा गया है. दूध का वजन, फैट की जांच और दैनिक कारोबार की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज होती है. बिचौलियों के खत्म होने से पशुपालकों को उनके दूध का सही दाम और सीधा फायदा मिल रहा है.
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