Toll Tax New Rule: देश के नेशनल हाईवे पर बिना रुके सफर करने यानी बैरियर-लेस टोलिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय अगले महीने से टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए नए डिजिटल मंथली और एनुअल पास जारी करेगा.
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मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, इन पास को सीधे फास्टैग से लिंक किया जाएगा. हालांकि, इस पास के लिए कितनी कीमत चुकानी होगी, इस पर अभी बातचीत चल रही है. नए नियम के तहत 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले गाड़ी मालिकों की पहचान उनके आधार नंबर के जरिए वेरिफाई की जाएगी.
यूपी के लोगों को भी मिलेगा फायदा
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का नया नियम किसी एक राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है. इसका मतलब है कि जब डिजिटल पास सिस्टम पूरी तरह लागू हो जाएगा, तब उत्तर प्रदेश के भी सभी नेशनल हाईवे टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों को मंथली और सालाना डिजिटल पास मिलेगा. यूपी के ग्रामीण और शहरी इलाकों के लोग जो टोल के पास रहते हैं, वे भी अपने आधार कार्ड के जरिए पास बनवा सकेंगे.
क्यों पड़ी इस नए डिजिटल पास की जरूरत?
फिलहाल देश के दो टोल प्लाजा गुजरात के चोरयासी और नई दिल्ली के मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर बिना बैरियर वाली नई टोल प्रणाली काम कर रही है. आंकड़ों के मुताबिक, बिना टोल दिए निकलने के मामलों में सबसे बड़ी संख्या इसी 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों की है.
मौजूदा नियमों के अनुसार, स्थानीय लोगों (गैर-व्यावसायिक वाहनों) को 350 रुपये में महीने भर का पास मिलता है, जिससे वे जितनी बार चाहें टोल पार कर सकते हैं, लेकिन अभी ये पास टोल प्लाजा पर जाकर फिजिकल रूप से लेना पड़ता है, जिसे टोल कर्मचारियों को दिखाना होता है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने बताया, "नई बैरियर-लेस प्रणाली में देखा गया कि कई स्थानीय लोगों के पास वैध पास नहीं था. वे टोल कर्मचारियों से जान-पहचान के भरोसे बिना टोल दिए निकल जाते थे, लेकिन नई ऑटोमैटिक प्रणाली में ऐसा नहीं चलेगा, क्योंकि बिना पास वाली गाड़ियों के निकलते ही तुरंत ई-नोटिस जारी हो जाता है. इसी समस्या को सुलझाने के लिए अब आधार कार्ड के जरिए एड्रेस वेरिफाई करके डिजिटल मंथली और सालाना पास दिए जाएंगे."
नया डिजिटल पास सरकार के 'राजमार्ग पोर्टल' पर उपलब्ध होगा. कयास लगाए जा रहे हैं कि नए डिजिटल पास की कीमत मौजूदा 350 रुपये से कम हो सकती है.
यूपी के लिए क्या नया?
दिल्ली-एनसीआर आने-जाने वालों को बड़ी राहत: पश्चिमी यूपी (जैसे नोएडा, गाजियाबाद, बागपत, मेरठ, हापुड़) से रोजाना लाखों लोग नौकरी और व्यापार के लिए दिल्ली आते-जाते हैं. दिल्ली के बॉर्डरों पर लगने वाले लंबे जाम का एक बड़ा कारण टोल बूथ होते हैं. इस नई तकनीक के आने से दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर गाड़ियां बिना रुके सीधे निकल सकेंगी, जिससे रोजाना सफर करने वालों का काफी समय बचेगा.
यूपी के एक्सप्रेसवे और हाईवे पर सफर होगा तेज: यूपी में यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, और एनएच-19 (दिल्ली-कानपुर-वाराणसी) जैसे व्यस्त रूट हैं. जब इन हाईवे पर बिना बैरियर वाला सिस्टम पूरी तरह लागू होगा, तो टोल पर रुकने का झंझट खत्म हो जाएगा. गाड़ी सीधे अपनी स्पीड में निकल जाएगी और फास्टैग या नंबर प्लेट से टोल अपने आप कट जाएगा.
स्थानीय लोगों के पैसे और समय की बचत: यूपी के कस्बों और गांवों में रहने वाले लोगों की जमीनें या रिश्तेदार अक्सर टोल प्लाजा के दूसरी तरफ होते हैं. 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों को अक्सर पास न होने या पुराना फिजिकल पास घर भूल जाने पर टोल कर्मियों से बहस करनी पड़ती थी. अब स्थानीय लोग बिना किसी रोक-टोक के जितनी बार चाहें टोल पार कर सकेंगे.
ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की बचत: टोल प्लाजा पर गाड़ियों के रुकने, लाइन में लगने और रेंगने के कारण बहुत सारा डीजल-पेट्रोल बर्बाद होता है. बिना बैरियर वाले टोल से गाड़ियों का मूवमेंट लगातार बना रहेगा, जिससे ईंधन की भारी बचत होगी और प्रदूषण भी कम होगा.
सेना के वाहनों को टोल छूट के लिए भी नया प्लान
नए ऑटोमैटिक टोल सिस्टम में सेना के वाहनों के मूवमेंट को लेकर भी कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं. इसके समाधान के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय और सैन्य मामलों के विभाग के बीच बातचीत चल रही है, ताकि रक्षा कर्मियों के वाहनों के लिए एक विशेष टोल-फ्री फास्टैग जारी किया जा सके.
वर्तमान नियमों के तहत रक्षा कर्मियों को पहचान पत्र या सेना के नियमों के तहत जारी पास दिखाने पर टोल से छूट मिलती है, लेकिन नए सिस्टम में इंसान नहीं बल्कि कैमरे काम करते हैं, इसलिए सेना के लिए अलग फास्टैग की तैयारी है.
नियम तोड़ा तो लगेगा दोगुना जुर्माना
बिना बैरियर वाले इस नए टोल प्लाजा पर हाई-परफॉर्मेंस कैमरों और सेंसर का इस्तेमाल होता है, जो गाड़ी की नंबर प्लेट और फास्टैग को खुद ही रीड कर लेते हैं. अगर कोई बिना टोल चुकाए या बिना पास के यहां से गुजरता है, तो गाड़ी मालिक को दोगुना टोल टैक्स देना होगा. हालांकि, अगर इस जुर्माने का भुगतान 72 घंटे के भीतर कर दिया जाता है, तो सिर्फ सामान्य टोल टैक्स ही कटेगा.
इन टोल प्लाजा पर भी शुरू होने जा रहा है नया सिस्टम
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टोल एजेंसी आईएचएमसीएल (IHMCL) ने देश के कई और टोल प्लाजा पर इस नई प्रणाली को लागू करने का कॉन्ट्रैक्ट दे दिया है. इनमें शामिल हैं:
इसके अलावा, सरकार देश के 108 और टोल प्लाजा पर इस आधुनिक सिस्टम को शुरू करने के लिए टेंडर आमंत्रित कर चुकी है.
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