अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और दानपात्र में गड़बड़ी के मामले में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एक बड़ा खुलासा किया है. 'TV9 भारतवर्ष' को दिए एक इंटरव्यू में पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि मंदिर परिसर के भीतर चंदे की हेरफेर का पहला सुराग तब मिला जब काउंटिंग रूम के पास बने एक टॉयलेट में लावारिस नकदी बरामद हुई. उन्होंने बताया कि इस घटना की भनक लगते ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय आधे घंटे के भीतर मौके पर पहुंच गए थे जिसके बाद इस पूरे घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुईं और मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई.
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टॉयलेट में नोट मिलने से शुरू हुई जांच की कहानी
इंटरव्यू के दौरान नृपेंद्र मिश्रा ने उस पहली घटना का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया जिसने मंदिर प्रशासन के कान खड़े कर दिए थे. उन्होंने बताया कि 'मुझे जो प्रारंभिक सूचना मिली है उसके अनुसार काउंटिंग रूम में करीब 40 से 44 लोग पैसे गिनने के काम में लगे थे जिनमें से ज्यादातर दैनिक मानदेय पर थे. जांच की शुरुआत तब हुई जब इसी कक्ष के पास बने एक टॉयलेट से कुछ लावारिस नोट बरामद की गई. इसकी सूचना मिलते ही चंपत राय तुरंत वहां पहुंचे और सहयोगियों से चर्चा के बाद राज्य सरकार से एसआईटी जांच की मांग की.'
बाहर के लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि कोई कर्मचारी नोट चुराकर ले जाना चाहता था. लेकिन सुरक्षा या चेकिंग के डर से उसे टॉयलेट में ही छोड़कर भागना पड़ा. नृपेंद्र मिश्रा ने स्वीकार किया कि इस घटना से श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है और ट्रस्ट को उनका विश्वास फिर से जीतना होगा.
नकदी के साथ-साथ आभूषणों की गिनती पर भी उठाए सवाल
नृपेंद्र मिश्रा ने चिंता जताते हुए कहा कि चढ़ावे की हेरफेर में सिर्फ नकदी ही नहीं बल्कि आभूषणों का प्रबंधन भी एक बड़ा विषय है. उन्होंने दान को दो हिस्सों में समझाया.
काउंटर का दान: जो लोग सीधे काउंटर पर सोनाचांदी जमाकर रसीद लेते हैं उसका हिसाब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में प्रतिदिन जमा होता है.
दानपात्र का गुप्त दान: श्रद्धालु दानपात्रों में नोटों के साथ-साथ सोने-चांदी की अंगूठी, कान की बाली और कंगन जैसी कीमती चीजें भी डाल देते हैं. जब बंडलों की गिनती होती है तो इन आभूषणों को गायब करना बेहद आसान होता है. इसकी निगरानी की व्यवस्था बेहद लचर थी.
लचर सुरक्षा और 800 CCTV कैमरों की नाकामी
प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि पूरे मंदिर परिसर में लगभग 800 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं जिसका कंट्रोल रूम पुलिस संभालती है. इसके बावजूद इतनी बड़ी लापरवाही हो गई जो यह दर्शाती है कि कैमरों की प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही थी. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पैसे गिनने वाले हर कर्मचारी का कड़ा चरित्र सत्यापन (कैरेक्टर वेरिफिकेशन) कराया जाए.
चंपत राय को बताया 'निष्कलंक'
इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा निशाने पर आए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नृपेंद्र मिश्रा ने पुरजोर बचाव किया. उन्होंने चंपत राय को पूरी तरह निष्कलंक बताते हुए कहा 'चंपत राय पिछले 37-40 वर्षों से इस आंदोलन से जुड़े हैं. उनका अपना कोई परिवार नहीं है और न ही उनका कोई निजी बैंक अकाउंट है. उनका पूरा खर्च ट्रस्ट ही उठाता है. शुरुआत में वह कुबेर टीला के पास एक लोहे के कच्चे केबिन में रहते थे. इस गड़बड़ी में उनकी कोई संलिप्तता नहीं है. हां, वह प्रबंधन के मुखिया हैं इसलिए लोग उन पर उंगली उठा रहे हैं.'
जमीन खरीद विवाद थी पहली चेतावनी, यह है आखिरी वॉर्निंग
नृपेंद्र मिश्रा ने इस वित्तीय गड़बड़ी को मंदिर प्रबंधन के लिए दूसरी बड़ी घटना बताया. उन्होंने कहा कि पहली गड़बड़ी तब हुई थी जब मंदिर के लिए जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा था और कम दाम की नजूल जमीनों को ट्रस्ट ने महंगे दामों पर खरीदा था.
उन्होंने सख्त लहजे में चेताते हुए कहा 'जमीन खरीद विवाद हमारे लिए पहली वार्निंग थी कि हमें सावधान हो जाना चाहिए था. लेकिन अब जो यह दूसरी घटना (चढ़ावा चोरी) सामने आई है यह प्रबंधन के लिए अंतिम चेतावनी है. अगर हमने अब भी अपनी व्यवस्थाओं को पारदर्शी और दुरुस्त नहीं किया तो हम श्रद्धालुओं का भरोसा पूरी तरह खो देंगे.'
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