Bullet Train: भारत में बुलेट ट्रेन का सपना अब सिर्फ मुंबई और अहमदाबाद तक सीमित नहीं है. देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश को रफ्तार की एक नई सौगात मिलने जा रही है. दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (Delhi-Varanasi Bullet Train Project) पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है.
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ये मुंबई-अहमदाबाद के बाद देश का दूसरा बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट है. इस कॉरिडोर के शुरू होने के बाद दिल्ली से यूपी के आखिरी छोर तक का सफर चंद घंटों में सिमट जाएगा.
समय की होगी भारी बचत
वर्तमान में दिल्ली से वाराणसी जाने में सुपरफास्ट ट्रेनों से भी 11 से 12 घंटे का समय लगता है, लेकिन बुलेट ट्रेन के आते ही यह दूरी मिनटों के हिसाब से तय होगी.
- अधिकतम स्पीड: 350 किमी/घंटा (डिजाइन स्पीड)
- ऑपरेटिंग स्पीड: 320 किमी/घंटा
- दिल्ली से लखनऊ: मात्र 2 घंटे
- दिल्ली से वाराणसी: करीब 3.5 से 4 घंटे
- दिल्ली से आगरा: 58 मिनट
- आगरा से वाराणसी: 2 घंटे 12 मिनट
- नोएडा एयरपोर्ट से वाराणसी: लगभग 1 घंटा 21 मिनट
कैसा होगा रूट और कहां-कहां बनेंगे स्टेशन?
नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे कॉरिडोर की लंबाई लगभग 865 किलोमीटर है. अगर इसमें अयोध्या जाने वाली अलग लाइन को भी जोड़ दें, तो यह करीब 958 किलोमीटर का नेटवर्क बनता है.
दिल्ली (सराय काले खां) → नोएडा (सेक्टर 146/147) → जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) → मथुरा → आगरा → फिरोजाबाद/एटा/इटावा → साउथ कन्नौज → लखनऊ → रायबरेली → प्रयागराज → न्यू भदोही → वाराणसी. आने वाले समय में इस लाइन को वाराणसी से बढ़ाकर पटना और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से तक ले जाने की भी योजना है.
- अयोध्या स्पर लाइन: इस प्रोजेक्ट में लखनऊ के बाद एक मुख्य लाइन रायबरेली-प्रयागराज होते हुए वाराणसी जाएगी, जबकि एक स्पर लाइन यानी कट-ऑफ रूट सीधे अयोध्या को कनेक्ट करेगी. इससे लोगों को दिल्ली से सीधे अयोध्या के लिए भी बुलेट ट्रेन मिल सकेगी.
उत्तर प्रदेश के लिए गेम चेंजर क्यों है ये प्रोजेक्ट?
- नोएडा और जेवर एयरपोर्ट को डबल बूस्ट: दिल्ली से निकलते ही नोएडा में दो स्टेशन प्रस्तावित हैं. एक नोएडा शहर में और दूसरा सीधे जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर. इससे एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में कमर्शियल और रियल एस्टेट डेवलपमेंट को पंख लग जाएंगे.
- धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन: रूट देश के सबसे बड़े टूरिस्ट हब्स को एक धागे में पिरोएगा. आगरा का ताजमहल, मथुरा-वृंदावन, अयोध्या का राम मंदिर, प्रयागराज का त्रिवेणी संगम और बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी (वाराणसी). विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए अब इन सभी जगहों की यात्रा बेहद आसान हो जाएगी.
- आर्थिक कॉरिडोर: प्रोजेक्ट वाराणसी, पटना और लखनऊ को एक बड़े इकोनॉमिक जोन के रूप में विकसित करने में मदद करेगा. स्टेशनों के आसपास नए बिजनेस हब, मॉल, होटल और लॉजिस्टिक्स पार्क बनेंगे, जिससे लाखों रोजगार पैदा होंगे.
- जमीन अधिग्रहण और सर्वे: प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए मथुरा, आगरा, लखनऊ, सुल्तानपुर और वाराणसी जैसे जिलों में हवाई लिडार (LiDAR) सर्वे और सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (SIA) जैसी प्रक्रियाएं तेजी से की जा रही हैं.
किराए को कम रखने का अनोखा प्लान
बुलेट ट्रेन का किराया आम जनता की जेब पर भारी न पड़े, इसके लिए NHSRCL स्टेशनों के आसपास स्टेशन एरिया डेवलपमेंट' प्लान पर काम कर रही है. स्टेशनों के पास कमर्शियल एक्टिविटीज (मॉल, ऑफिस, दुकानें) से जो कमाई होगी, उसका इस्तेमाल यात्रियों के किराए को सब्सिडी देने में किया जा सकता है.
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