जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में बरेली के असिस्टेंट प्रोफेसर मोहित भारद्वाज ने लगाए नारे, वापस गए तो चली गई नौकरी

Mohit Bhardwaj: NEET पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन तेज हो गया है. प्रदर्शन का समर्थन करने पहुंचे बरेली के असिस्टेंट प्रोफेसर को नौकरी से हटा दिया गया.

Professor Mohit Bhardwaj

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NEET पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन प्रचंड रूप ले चुका है. 20 जुलाई के संसद मार्च के बाद से देश के कोने-कोने से छात्र और युवा दिल्ली पहुंच रहे हैं. इस विशाल आंदोलन को सिर्फ छात्रों ही नहीं बल्कि कला, साहित्य, खेल और शिक्षा जगत के कई प्रमुख नामों का भी समर्थन मिल रहा है.

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इसी बीच आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे बरेली के एक असिस्टेंट प्रोफेसर मोहित भारद्वाज को कॉलेज प्रशासन ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया है. वहीं दूसरी ओर इस गतिरोध को खत्म करने के लिए क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक और CJP नेताओं की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ अहम बैठक हुई है.

छात्रों के समर्थन में उतरे बरेली के असिस्टेंट प्रोफेसर सस्पेंड

बरेली के बहेड़ी स्थित गन्ना उत्पादक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पदस्थ असिस्टेंट प्रोफेसर मोहित भारद्वाज जंतर-मंतर पर छात्रों के दर्द में शामिल होने पहुंचे थे. 18 जुलाई से 21 जुलाई तक आंदोलन में शामिल होने के बाद जब वे लौटे तो उन्हें निष्कासन का पत्र थमा दिया गया. इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए मोहित भारद्वाज ने कॉलेज प्रशासन और प्रबंधक पर राजनीतिक विद्वेष के तहत कार्रवाई करने का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा 'मैं एक शिक्षक होने के नाते छात्रों का दर्द समझकर उनके बेहतर भविष्य की आवाज उठाने गया था. मेरा पिछला रिकॉर्ड बेदाग रहा है. इसके बावजूद अचानक यह निष्कासन गलत है.'

बता दें कि प्रबंधक समिति के अध्यक्ष का संबंध भारतीय जनता पार्टी से बताया जा रहा है. जबकि मोहित भारद्वाज समाजवादी युवजन सभा (बरेली) से जुड़े हैं. इस कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने जिलाधिकारी और उच्च शिक्षा अधिकारियों के द्वार खटखटाए हैं और आगे धरने पर बैठने की चेतावनी दी है.

सरकार और CJP के बीच बातचीत में दो मांगों पर बनी सहमति

आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोनम वांगचुक तथा CJP के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. सूत्रों के मुताबिक, वार्ता में दो प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख देखने को मिला है.

1.FIR और हिरासतों की वापसी: 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान जिन प्रदर्शनकारियों व छात्रों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे या जिन्हें हिरासत में लिया गया था, उन्हें वापस लेने और रिहा करने के निर्देश दिल्ली पुलिस को दिए जाएंगे.

2.पीड़ित परिवारों को मुआवजा: NEET धांधली के तनाव में अपनी जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को आर्थिक मदद और मुआवजा दिया जाएगा. हालांकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की तीसरी मुख्य मांग पर फिलहाल सहमति नहीं बन सकी है.

आंदोलन को मिल रहा राष्ट्रव्यापी समर्थन

जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था संभालना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. आम जनता से लेकर हुमा कुरैशी, शबाना आजमी और प्रकाश राज जैसी फिल्मी हस्तियों ने भी युवाओं की मांगों का समर्थन किया है. इसके अलावा उत्तराखंड पुलिस के एक कांस्टेबल द्वारा भी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर नैतिक समर्थन देने का मामला सामने आया है.