26 दिन की भूख हड़ताल खत्म करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला बयान सामने आया. पीएम मोदी ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि वे डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और जल्द से जल्द अपना पुराना वजन वापस हासिल करें.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैं सोनम जी से आग्रह करता हूं की वो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या रखें और जल्द से जल्द अपना पुराना वजन फिर से प्राप्त करें. मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूं कि सोनम जी स्वस्थ रहें."
26 दिन बाद खत्म किया अनशन
सोनम वांगचुक ने सरकार की ओर से अपनी मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद 26 दिन से चल रही अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचे और सरकार का आश्वासन दिया. इसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया. वांगचुक ने बताया कि उस समय लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे.
सरकार ने क्या आश्वासन दिया?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अस्पताल में वांगचुक, उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो और अन्य लोगों की मौजूदगी में सरकार का आश्वासन पढ़कर सुनाया.
सरकार की ओर से कहा गया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई 2026 को संसद मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ केस दर्ज नहीं करने के मुद्दे पर सरकार सकारात्मक है.
इसके अलावा सरकार ने संसद में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा कराने का भरोसा भी दोहराया.
सरकार ने यह भी कहा कि हालिया NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक तरीके से विचार किया जा रहा है.
65 सांसदों ने भी की थी अपील
सोनम वांगचुक ने बताया कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के कुल 65 सांसद उनसे मिलने पहुंचे थे या फिर उन्होंने पत्र पर साइन कर उनसे अनशन खत्म करने की अपील की थी.
उन्होंने कहा कि कई दौर की बातचीत और अलग-अलग शर्तों पर लंबे समय तक चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया. साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि आंदोलन के दौरान कहीं भी किसी तरह की हिंसा न होने दें. उन्होंने कहा कि जल्द ही वह पूरे घटनाक्रम और शर्तों की विस्तृत जानकारी एक अलग वीडियो के जरिए साझा करेंगे.
CJP ने क्या कहा?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने का स्वागत किया है. पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि वे राहत महसूस कर रहे हैं और वांगचुक के साहस तथा त्याग के लिए उनका धन्यवाद करते हैं.
हालांकि CJP ने साफ किया कि जंतर-मंतर पर उसका शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा. संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा.
संगठन की मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जवाबदेही तय करना, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR तथा कानूनी कार्रवाई वापस लेना शामिल है.
28 जून से आंदोलन से जुड़े थे वांगचुक
सोनम वांगचुक 28 जून को CJP के नेतृत्व में चल रहे जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल हुए थे. उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जवाबदेही तय करने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी.
26 दिन की भूख हड़ताल के दौरान उनका करीब 11 किलो वजन कम हो गया था. इस दौरान उन्होंने लगातार लोगों से आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की.
18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी. पुलिस का कहना था कि उन्हें चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत है. इसके बाद उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और कहा कि उन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ सरकारी अस्पताल में रखा जा रहा है. बाद में हाईकोर्ट की प्रक्रिया के बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया गया, जहां उन्होंने अपना अनशन जारी रखा.
मेदांता अस्पताल में रहते हुए वांगचुक ने कहा था कि वह अपने छात्रों और एक शिक्षक के रूप में अपने काम पर लौटना चाहते हैं, लेकिन युवा प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हुए बिना वह अपना अनशन समाप्त नहीं कर सकते.
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