Ali Ahmed Convoy Route Change News: अतीक अहमद के बड़े बेटे अली अहमद को छोटे भाई अबान अहमद के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए झांसी जेल से प्रयागराज ले जाया जा रहा है. भारी पुलिस सुरक्षा के बीच निकले अली के काफिले को रास्ते में अचानक रोक दिया गया. करीब दो मिनट तक जालौन के उरई के बड़ा गांव के पास झांसी-कानपुर हाईवे पर काफिला रुका रहा. इसके बाद काफिला दोबारा प्रयागराज के लिए रवाना हुआ, लेकिन इस दौरान उसका रूट भी बदल दिया गया. पहले बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के रास्ते प्रयागराज जाने की बात थी, लेकिन बाद में झांसी-कानपुर हाईवे से काफिला ले जाने का फैसला किया गया. काफिले में एक काले रंग की स्कॉर्पियो भी शामिल की गई.
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अचानक क्यों रोकना पड़ा अली का काफिला?
अली अहमद को लेकर जा रहे काफिले के अचानक रुकने और रूट बदलने से कई सवाल उठे. जालौन के कैथेरी टोल प्लाजा के पास मौजूद रिपोर्टिंग के दौरान बताया गया कि पहले काफिले के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का रास्ता तय था. यह रास्ता प्रयागराज पहुंचने के लिए करीब तीन घंटे का बताया गया. लेकिन अचानक सुरक्षा कारणों से रूट में बदलाव किया गया और काफिले को कानपुर के रास्ते प्रयागराज ले जाने का निर्णय लिया गया. मौके पर प्रिजनर वैन भी दिखाई दी, जिसे पुलिसकर्मियों ने चारों तरफ से घेर रखा था.
प्रिजनर वैन के आसपास दिखी पुलिस की हलचल
काफिले के रुकने के दौरान प्रिजनर वैन को खोला गया और कुछ पुलिसकर्मी उसके अंदर-बाहर आते-जाते दिखाई दिए. मौके से जानकारी देते हुए बताया गया, "सुरक्षा की दृष्टि से रूट बदला गया है, यही पुलिस का मोटिव है." इसके बाद काफिला दोबारा आगे बढ़ा. सुरक्षा को देखते हुए पूरे रास्ते पुलिस की गाड़ियां अली की प्रिजनर वैन के साथ चल रही हैं. काफिले में अतिरिक्त वाहन शामिल किए जाने के बाद सुरक्षा घेरा और मजबूत किया गया.
जेल से निकलते समय बेहद भावुक दिखा अली
सुबह अली अहमद को झांसी जेल से बाहर निकालने से पहले जेल के आसपास सुरक्षा का कड़ा घेरा बनाया गया था. प्रिजनर वैन को जेल गेट के बिल्कुल पास लगाया गया था. अली को पूरी तरह कवर की गई गाड़ी में बैठाया गया और चारों तरफ पुलिसकर्मियों की तैनाती रही. इस दौरान कैमरे में अली की एक झलक भी कैद हुई. वह चश्मे के पीछे नम आंखों, शांत चेहरे और बेचैनी भरी बॉडी लैंग्वेज में नजर आया. उसे अपने छोटे भाई अबान को आखिरी विदाई देने के लिए प्रयागराज ले जाया जा रहा है.
भाई से मिलने जा रहा था अबान
दरअसल, अबान अहमद अपने बड़े भाई अली से मिलने के लिए प्रयागराज से झांसी आ रहा था. बताया गया कि वह अली के लिए खास तोहफा लेकर निकला था, लेकिन रास्ते में उसकी कार हादसे का शिकार हो गई और उसकी मौत हो गई. इसके बाद अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उसके दोनों बड़े भाइयों अली और उमर ने पैरोल मांगी थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ पैरोल मंजूर की. अली को झांसी से प्रयागराज और उमर को लखनऊ से प्रयागराज लाया जा रहा है.
पैरोल में लगी हैं कई शर्तें
अली अहमद को मिली पैरोल के साथ कई शर्तें भी रखी गई हैं. वह मीडिया से बातचीत नहीं कर सकता और सोशल मीडिया पर किसी तरह का रिएक्शन भी नहीं दे सकता. इसके अलावा उसे किसी सार्वजनिक सभा या दूसरे कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं है. अली को सीधे प्रयागराज के कब्रिस्तान जाना होगा, जहां वह अपने छोटे भाई अबान और परिवार के लोगों से मुलाकात करेगा. अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे वापस झांसी जिला जेल लौटना होगा. इसी वजह से अली के पूरे सफर के दौरान पुलिस सुरक्षा बेहद कड़ी रखी गई है.
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