1 अक्टूबर से रेलवे के नए नियम: टिकट है, फिर भी देना पड़ सकता है जुर्माना! अब ये दस्तावेज जरूरी

यूपी तक

• 01:58 PM • 01 Oct 2026

अक्टूबर में ट्रेन से सफर करने वालों के लिए पहचान पत्र साथ रखना जरूरी हो सकता है. सेंट्रल रेलवे 1 से 31 अक्टूबर तक विशेष टिकट चेकिंग अभियान चलाएगा, जिसमें टिकट के साथ रियायत, कोटे, ई-पास और पीटीओ जैसी सुविधाओं की पात्रता भी जांची जाएगी.

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अक्टूबर का महीना यानी त्योहार, छुट्टियां और घर जाने के लिए ट्रेनों में बढ़ती भीड़... ऐसे में अगर आपने ट्रेन का टिकट करा लिया है और सोच रहे हैं कि अब बस स्टेशन पहुंचकर ट्रेन पकड़नी है तो एक चीज और संभालकर रख लीजिए. अपना वैध पहचान पत्र. खासकर तब, जब आप किसी रियायत, कोटे, रेलवे पास या एक से ज्यादा यात्रियों वाले टिकट पर सफर कर रहे हैं.

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सेंट्रल रेलवे 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक टिकट चेकिंग का विशेष अभियान चलाने जा रहा है. इस दौरान रेलवे सिर्फ यह नहीं देखेगा कि आपके हाथ में टिकट है या नहीं, बल्कि कई मामलों में यह भी देखा जाएगा कि टिकट जिस आधार पर मिला है, उसके लिए आप पात्र हैं या नहीं. ऐसे में पहचान पत्र घर पर भूल जाना भारी पड़ सकता है.

टिकट है, फिर भी क्यों हो सकती है कार्रवाई?

इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. मान लीजिए आपने किसी रियायत या विशेष कोटे के तहत टिकट लिया है. टिकट बिल्कुल सही है, लेकिन जांच के दौरान आपसे उस सुविधा के लिए जरूरी पहचान या पात्रता का दस्तावेज मांगा गया और आप उसे दिखा नहीं पाए. ऐसे में सिर्फ यह कहना कि “लेकिन मेरे पास तो टिकट है” काम नहीं आएगा.

रेलवे का अभियान इसी तरह के मामलों की जांच को सख्त करने के लिए है. टिकट चेकिंग स्टाफ जरूरत पड़ने पर अपने हैंडहेल्ड TTE ऐप से टिकट और यात्री की जानकारी भी जांच सकता है.

एक टिकट पर कई लोग जा रहे हैं तो ये बात याद रखें

अब मान लीजिए एक ही टिकट पर परिवार के कई लोग सफर कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में कम से कम एक यात्री के पास रेलवे की ओर से स्वीकार किया गया मूल पहचान पत्र होना जरूरी बताया गया है. जरूरी पहचान पत्र नहीं दिखा पाने की स्थिति में उस टिकट पर सफर कर रहे यात्रियों पर बिना टिकट यात्रा के नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है.

अब बात उस ई-पास की, जिसका नाम आपने कई बार सुना होगा

रेलवे कर्मचारियों के लिए ट्रेन से यात्रा करने की एक सुविधा ई-पास होती है. आसान भाषा में समझें तो ये रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाली यात्रा सुविधा है, जिसके जरिए वे तय नियमों के मुताबिक ट्रेन में यात्रा कर सकते हैं.

इसके अलावा पीटीओ (Privilege Ticket Order) भी होता है. इसका इस्तेमाल रेलवे कर्मचारियों और उनके पात्र परिजनों को रियायती दर पर यात्रा की सुविधा देने के लिए किया जाता है. इसमें सामान्य किराये की तुलना में कम रकम देकर टिकट लिया जा सकता है.

अब अक्टूबर की इस विशेष चेकिंग में ई-पास और पीटीओ से यात्रा करने वाले यात्रियों की भी जांच होगी. ऐसे यात्रियों को सफर के दौरान अपना मूल पहचान पत्र साथ रखना होगा. साथ ही ई-पास या पीटीओ से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी होना भी जरूरी है. रेलवे कर्मचारी या उनके परिवार के किसी सदस्य के पास पास है, इसका मतलब यह नहीं कि टिकट चेकिंग के दौरान बाकी दस्तावेजों की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.

रियायत या कोटे से टिकट लिया है तो और सावधान

रेलवे में कुछ यात्रियों को उनकी श्रेणी या पात्रता के आधार पर रियायत या विशेष कोटे का लाभ मिलता है. ऐसे टिकटों की भी जांच की जाएगी. जांच के दौरान रेलवे देख सकता है कि जिस सुविधा के आधार पर टिकट लिया गया है, यात्री वास्तव में उसके लिए पात्र है या नहीं... इसलिए अगर आपने किसी विशेष कोटे या रियायत के तहत टिकट कराया है तो यात्रा के समय उससे जुड़े जरूरी दस्तावेज जरूर रखें. यही वजह है कि अक्टूबर में ट्रेन पकड़ने वालों के लिए “टिकट है तो सब ठीक है” वाली सोच थोड़ी महंगी पड़ सकती है.

कौन-सा आईडी कार्ड साथ रखें?

जरूरत पड़ने पर रेलवे की ओर से स्वीकार किए जाने वाले पहचान पत्रों में आधार कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर फोटो आईडी और केंद्र या राज्य सरकार की ओर से जारी फोटो पहचान पत्र शामिल हैं.

मान्यता प्राप्त स्कूल या कॉलेज का फोटो वाला छात्र पहचान पत्र, फोटो वाली राष्ट्रीयकृत बैंक पासबुक और लैमिनेटेड फोटो वाला बैंक क्रेडिट कार्ड भी निर्धारित पहचान दस्तावेजों में शामिल हैं. 

यहां एक बात खास है- जहां मूल पहचान पत्र मांगा गया है, वहां केवल मोबाइल में उसकी फोटो या फोटोकॉपी के भरोसे रहना ठीक नहीं होगा. स्क्रीनशॉट से काम नहीं चलेगा... ऐसे में मूल पहचान पत्र अपने साथ लेकर ही यात्रा करें. 

क्या सिर्फ रिजर्वेशन वाले यात्रियों की जांच होगी?

नहीं. रेलवे का अभियान सिर्फ रिजर्व सीट वाले यात्रियों तक सीमित नहीं है. जनरल यानी अनरिजर्व्ड टिकट लेकर सफर करने वालों की भी जांच हो सकती है. अगर किसी यात्री के टिकट पर शक होता है तो चेकिंग स्टाफ उसे अपने सिस्टम या TTE ऐप के जरिए जांच सकता है. 

आखिर रेलवे इतनी सख्ती क्यों कर रहा है?

रेलवे का कहना है कि इस अभियान का मकसद टिकटों की जांच के साथ-साथ रियायत, कोटे और पास जैसी सुविधाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना है. त्योहारों के दौरान ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है. ऐसे में रेलवे टिकट चेकिंग को और प्रभावी बनाना चाहता है.

इसलिए अगर आप अक्टूबर में ट्रेन से सफर करने वाले हैं तो स्टेशन निकलने से पहले एक छोटी-सी चेकलिस्ट बना लें- टिकट, जरूरी मूल पहचान पत्र और अगर टिकट किसी रियायत, कोटे, ई-पास या पीटीओ के आधार पर है तो उससे जुड़े दस्तावेज.

क्योंकि इस बार टिकट चेक होने पर सिर्फ ये सवाल नहीं होगा कि “टिकट है या नहीं?” जरूरत पड़ने पर ये भी पूछा जा सकता है कि “यह टिकट आपको किस आधार पर मिला और क्या आप उसके लिए पात्र हैं?”

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