SIR को लेकर अखिलेश यादव ने उठाई आवाज, लेकिन गांव वालों ने तो ये कहकर पूरी कहानी ही पलट दी

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के शहजादेपुर गांव में पंचायत चुनाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. गांव के कई वोट कटने की शिकायतें सामने आई हैं.

पुष्पेंद्र सिंह

• 12:56 PM • 09 Jan 2026

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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की मौलीखेड़ा ग्राम पंचायत के शहजादेपुर गांव में हाल ही में पंचायत चुनाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर दो वीडियो साझा किए, जिनमें गांव के कुछ लोगों ने अपने वोट कट जाने की बात कही थी. हालांकि, बाद में ये वीडियो डिलीट कर दिए गए थे.  इस विवाद का असली कारण क्या था और एसआईआर प्रक्रिया से इसका क्या संबंध है, इस बारे में UP Tak की टीम ने गांव में जाकर स्थानीय लोगों से बातचीत की.  

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ग्रामीणों ने अपने अनुभव साझा किए

शहजादेपुर पहुंच के यूपी Tak की टीम ने वहां के लोगों से बात की. इसी दौरान वहां के निवासी संदीप कुमार से पुछा गया कि हाल ही में एक वीडियो सामने आया था जिसमें उन्होंने  कहा था कि उनका वोट कट गया है. असल में मामला क्या है? इस पर संदीप कुमार ने बताया कि “मेरा वोट ग्राम पंचायत सूची से कट गया है. 2021 की सूची में मेरा और मेरी पत्नी का नाम था लेकिन 2025 वाली सूची में हमारे नाम नहीं हैं. कई और लोगों के नाम भी इस नई सूची में गायब हैं.” संदीप ने आगे बताया कि उनके घर 8 वोट थे, जिनमें से 2 वोट काट दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि “वोट काटने का कारण बताया गया कि डेटा अपर्याप्त है, जबकि हमने सभी आधार और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे.”

एसआईआर प्रक्रिया पर ग्रामीणों का बयान

आगे वहीं मजूद एक और स्थानीय निवासी रोहित कुमार से सवाल किया गया. उनसे पुछा गया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनके गांव से जुड़ा एक ट्वीट किया था. इसमें गांव के कुछ लोग दिखाई दे रहे थे और एसआईआर को लेकर बात की गई थी. असल में यह मामला क्या है? इस पर रोहित कुमार ने बताया कि "उस वीडियो का एसआईआर से कोई वास्ता नहीं है. पंचायत चुनाव की 2021 वाली सूची में मेरे पिता का नाम था लेकिन 2025 में जो नई सूची आई, उसमें नाम हटा दिया गया. कई परिवारों के वोट भी इसी तरह कट गए हैं. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की सच्चाई शायद राष्ट्रीय अध्यक्ष तक नहीं पहुंची है." उन्होंने आगे कहा कि "एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह सही हुई है.  मैंने खुद एसआईआर प्रहरी के रूप में काम किया और इसमें किसी पर कोई आरोप बेबुनियाद हैं. पंचायत स्तर पर कुछ गलतियां हो सकती हैं लेकिन एसआईआर से जुड़े मामले सही हैं."

रोहित ने आगे बताया "मेरे पिता का कटे हुए वोट को वापस जोड़ने के लिए मैंने एसडीएम को आवेदन दिया था और तहसीलदार ने जांच की. वीडियो का कोई औचित्य नहीं है." जब रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि वर्तमान प्रधान ने 200 से अधिक वोट कटने का दावा किया है तो इसपर  रोहित ने कहा कि "सटीक संख्या बताना मुश्किल है लेकिन हर पांच साल में वोट बढ़ना चाहिए. पहले हमारे गांव में 1900-1950 वोट थे अब लगभग 1800 हैं. यानी करीब 100 वोट कम हुए हैं. इसे चुनाव आयोग को देखना चाहिए."

वर्तमान प्रधान और बीएलओ पर आरोप

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि वर्तमान प्रधान मनोज यादव के अनुसार, कुछ पुराने प्रधान के रिश्तेदार बीएलओ के रूप में कार्यरत थे. उन्होंने अपने स्वार्थ या स्थानीय कारणों से वोट काटने की कार्रवाई की. सुदीप नामक ग्रामीण ने बताया कि “बीएलओ गांव के ही थे और अपने स्थानीय रिश्तेदारों के लिए वोट को प्रभावित कर सकते थे.

यहां देखें पूरी वीडियो रिपोर्ट

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