लखीमपुर खीरी केस: मंत्री के बेटे पर धारा 302 भी, एक्सपर्ट्स से जानिए पुलिस को क्या करना था

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लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले में केद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा आरोपी हैं. इस मामले में आशीष और अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिनमें धारा 302 (हत्या) भी लगाई गई है.

इतनी गंभीर धारा में FIR दर्ज करने के बावजूद यूपी पुलिस आशीष मिश्रा को हिरासत में लेने की बात तो दूर, अब तक पूछताछ भी नहीं कर पाई है. आशीष को पुलिस ने 8 अक्टूबर को सुबह 10 बजे तक क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने का नोटिस भी भेजा था, लेकिन वह नहीं आए. इसके बाद उन्हें अब 9 अक्टूबर को सुबह 11 बजे तक पेश होने का नोटिस भेजा गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने 8 अक्टूबर को ही इस मामले में यूपी सरकार को जमकर फटकार लगाई चीफ जस्टिस एनवी रमण ने आरोपी आशीष मिश्रा के प्रति रियायत बरतने पर सवाल उठाए. सीजेआई ने पूछा आखिर आप क्या संदेश देना चाहते हैं, (आईपीसी की धारा) 302 के मामले में पुलिस सामान्य तौर पर क्या करती है, सीधा गिरफ्तार ही करते हैं ना, अभियुक्त जो भी हो कानून को अपना काम करना चाहिए.

ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर धारा 302 के अभियुक्त के लिए कैसी कार्रवाई होनी चाहिए थी? इस बीच, तमाम सवालों के बीच हमने एक्सपर्ट्स से जानना चाहा कि क्या इस पूरे मामले में यूपी पुलिस ने वाकई लापरवाही बरती है?

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यूपी पुलिस को क्या करना चाहिए था? जानिए पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह की राय

”जब यहां मालूम था कि तनाव हो सकता है, तो दंगल स्थल से लेकर बवाल की आशंका वाली जगह पर पुलिस बल की उचित व्यवस्था होनी चाहिए थी.”

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”वायरलेस कम्युनिकेशन और मोबाइल पेट्रोलिंग उचित तरीके से होनी चाहिए थी ताकि किसी मारपीट की घटना पर त्वरित एक्शन लेकर, हस्तक्षेप कर किसी अप्रिय घटना को टाला जा सकता था.”

”ऐसा लगता है कि अग्रिम इंटेलिजेंस होने के बावजूद प्रभावी गस्त और गाड़ाबंदी पिकेट्स नहीं लगे थे, जिसकी वजह से यह अप्रिय घटना घटी.”

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”ड्रोन से नजर रखी जा सकती थी, वॉचटावर बनाए जाने चाहिए थे, मोटरसाइकिल-जीप और फुट पेट्रोलिंग जैसी सामान्य प्रक्रियाओं की भी व्यवस्था नहीं की गई.”

”एडवांस इंटेलिजेंस के आधार पर प्रिवेंटिव अरेस्ट होने चाहिए थे. शरारती तत्वों की गिरफ्तारी पहले ही हो जानी चाहिए थी, जो नहीं हुई.”

अप्रिय घटना जब हो गई तो क्या करना चाहिए था? पूर्व डीजीपी ने बताया

”स्पॉट अरेस्ट का महत्व अलग होता है. जो आक्रामक पक्ष दिख रहा था, जिन्होंने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी या जिन्होंने गाड़ी चढ़ाकर हत्या की, उन संदिग्धों को तुरंत हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर देनी चाहिए थी.”

”जिसे मंत्री पुत्र का हथियार बताया जा रहा था उसे पुलिस को तत्काल कब्जे में लेकर जांच करानी चाहिए थी.”

”जो वीडियो वायरल हो रहे थे, उनकी तत्काल फॉरेंसिक जांच करानी चाहिए थी. मंत्री पुत्र का नाम प्रमुखता से आ रहा था. 72 घंटे के भीतर पूछताछ सुनिश्चित की जानी चाहिए थी.”

क्या पुलिस 302 के हर एक मामले में ऐसा ही करती है? सुप्रीम कोर्ट के वकील फुजैल खान से जानिए ऐसी संगीन धाराओं के केस में क्या होना चाहिए था

यूपी तक ने लखीमपुर खीरी केस के मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक्सपर्ट वकील की भी राय ली. हमारे सहयोगी संजय शर्मा ने फुजैल खान से खास बातचीत की. आइए जानते हैं इस मामले में उनकी राय

”लखीमपुर के प्रकरण में जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया, उस हिसाब से तो यूपी पुलिस को अपराधियों को कल (गुरुवार) ही गिरफ्तार कर लेना चाहिए था.”

”कोर्ट में पता चला कि पुलिस ने नोटिस चस्पा किया है. जब किसी पर इस तरह का आपराधिक मामला दर्ज होता है तो पुलिस को तुरंत एक्शन लेना चाहिए. ये इस तरह का आपराधिक मामला है कि इसमें पुलिस प्रशासन पर सवाल उठता है.”

”सामान्य तौर पर जब किसी पर आईपीसी की धारा 302 और 307 के तहत FIR दर्ज होती है, तो पुलिस नोटिस की कार्रवाई से पहले आरोपी को गिरफ्तार करती है.”

”क्रिमिनल लॉ का प्रिंसिपल है कि एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद जितनी जल्दी हो सके आरोपी को पकड़ना पड़ता है और सबूत इकट्ठे करने होते हैं. पहले 24 घंटे सबसे अहम होते हैं.”

”ये एक इंटरनैशनल इशू भी है. जैसी वीडियो फुटेज दिखी हैं. मैं ट्रायल या इन्वेस्टिगेशन पर कमेंट नहीं करना चाह रहा हूं, लेकिन जो तथ्य सामने आए हैं वे काफी संगीन हैं. इस पर पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. जितने लोग नामजद हैं उनकी तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए.”

आशीष के खिलाफ क्या हैं आरोप?

लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया थाने में बहराइच जिले के नानपारा क्षेत्र बंजारन टांडा निवासी जगजीत सिंह ने आशीष और कुछ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया है.

तिकुनिया थाने में आशीष और अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 147 (उपद्रव), 148 (घातक अस्त्र का प्रयोग), 149 (भीड़ हिंसा), 279 (सार्वजनिक स्थल पर वाहन से मानव जीवन के लिए संकट पैदा करना), 338 (दूसरों के जीवन के लिए संकट पैदा करना), 304 ए (किसी की असावधानी से किसी की मौत होना), 302 (हत्या) और 120 बी (साजिश रचने) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

केस की तहरीर में आरोप लगाया गया कि 3 अक्टूबर को समस्त क्षेत्रवासी किसान और मजदूर अजय कुमार मिश्रा और यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ काले झंडे दिखाने के लिए महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज क्रीड़ा स्थल, तिकुनिया, खीरी में शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे और तभी आशीष (निवासी बनबीरपुर, निघासन, खीरी) और 15-20 अज्ञात और सशस्त्र लोग तीन चार पहिया वाहनों पर सवार होकर बनवीरपुर से सभास्थल की तरफ तेज गति से आए. आरोप लगाया गया है कि आशीष अपने वाहन में बायीं सीट पर बैठकर गोलीबारी करते हुए और भीड़ को रौंदते हुए आगे बढ़े.

हालांकि, इस मामले में आशीष मिश्रा ने दावा किया कि घटना के वक्त वह काफिले की गाड़ियों में मौजूद नहीं थे. इसके साथ ही आशीष ने दावा किया, ”हमारे कार्यकर्ता डिप्टी सीएम को रिसीव करने जा रहे थे, जैसे ही वो लोग तिकुनिया से निकले, तो अपने आप को किसान कहने वालों ने आक्रमण कर दिया.”

7 अक्टूबर को पुलिस ने एक बयान जारी कर बताया था कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में दर्ज इस केस में अब तक की विवेचना से 1 नामजद आरोपी के अतिरिक्त अज्ञात आरोपियों में 6 के नाम प्रकाश में आए हैं, जिनमें से 3 आरोपियों की मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस ने बताया है कि बाकी आरोपियों में से 2 (लवकुश और आशीष पांडे) को 7 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया गया.

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